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धान खरीदी घोटाले में MP सरकार को 43 करोड़ का नुकसान, अधिकारियों की संपत्ति से भरपाई होगी

जबलपुर
 मध्य प्रदेश के जबलपुर में करोड़ों के घोटाले में सरकारी खजाने का जो नुकसान हुआ है उसको पूरा करने के लिए अब अधिकारी-कर्मचारियों की संपत्ति को नीलाम किया जाएगा. जबलपुर कलेक्टर ने 12 कर्मचारियों की संपत्ति कुर्की के आदेश जारी किए हैं. आरोप है कि, इन लोगों की मिली भगत से जबलपुर में एक धान खरीदी में घोटाला हुआ था. जिसमें सरकार को लगभग 43 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था. फिलहाल अधिकारी-कर्मचारियों से 16 करोड़ रुपए की वसूली की जा रही है.

43 करोड़ के धान घोटाले का पर्दाफाश

जबलपुर में पिछले साल लगभग 43 करोड़ रुपए का धान घोटाला किया गया था. आरोप है कि, इसमें कई मिल मालिकों ने जबलपुर के सरकारी गोदाम से धान मिलिंग के लिए ली थी, लेकिन उतना चावल वापस नहीं किया. कई स्थानों पर तो अच्छी धान को गोदाम से उठाया गया था, लेकिन उसे मिलिंग के लिए ना भेज कर सीधे बाजार में बेच दिया गया. उसके बदले बाजार से खराब किस्म का चावल खरीद कर नागरिक आपूर्ति में जमा करवा दिया गया. सरकार से ट्रांसपोर्टेशन और मिलिंग का पैसा ले लिया गया. इस दौरान जिन गाड़ियों से ट्रांसपोर्टेशन दिखाया गया था, उस गाड़ियों का नंबर स्कूटर और कहीं कार का पाया गया था.

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16 मिल मालिक और 12 अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ केस

जब इस मामले में जांच शुरू की गई तो 43 राइस मिलर्स के अकाउंट में गड़बड़ी पाई गई. जिसमें करीब 43 करोड़ रुपए का धान घोटाला हुआ. सरकार को चूना लगाने के साथ ही कई किसानों के साथ भी धोखाधड़ी की गई और उन्हें पैसा नहीं दिया गया. तत्कालीन कलेक्टर दीपक सक्सेना ने जब इस मामले की बारीकी से जांच करवाई तो 16 मिल मालिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई. वहीं 12 अधिकारी कर्मचारियों को भी दोषी पाया गया. इन लोगों के खिलाफ भी गबन का मुकदमा दर्ज किया गया. क्योंकि इन अधिकारी कर्मचारियों की भी इस पूरे फर्जीवाड़े में मिलीभगत थी.

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सहकारी समिति के 4 कर्मचारी के खिलाफ मामला दर्ज

इस मामले में सरकार को लगभग 43 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ. जिसमें से 16 करोड़ रुपए की वसूली अधिकारी कर्मचारी से किया जाना है. जबलपुर के वर्तमान कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने कर्मचारियों के खिलाफ नोटिस जारी किए हैं और उनकी चल अचल संपत्ति को कुर्क किया जा रहा है. इसी को बेचकर सरकार अपना नुकसान पूरा करेगी और किसानों को भुगतान करेगी. इस मामले में चार सहकारी समिति के कर्मचारियों को और अधिकारियों के खिलाफ नोटिस जारी किए गए हैं.

अधिकारी और सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में होगी धान खरीदी

जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने कहा कि "पूर्व के अनुभव अच्छे नहीं हैं. इसलिए इस बार खरीदी में ज्यादातर स्वयं सहायता समूह को आगे लाया जा रहा है, उनकी ट्रेनिंग की जा रही है. खरीदी का पूरा काम सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में होगा. पहले स्तर पर सर्वेयर, नोडल ऑफिसर और सीसीटीवी कैमरे के बावजूद भी दूसरे अधिकारियों की भी ड्यूटी लगा रहे हैं. जो इस पूरी धान खरीदी को अपने निगरानी में करवाएंगे. धान खरीदी की रिपोर्ट प्रतिदिन तैयार की जाएगी."

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सरकारी घाटे या नुकसान को इसी तरीके से अधिकारी कर्मचारियों के व्यक्तिगत चल अचल संपत्ति के माध्यम से बेचकर वसूला जाएगा. तो दूसरे अधिकारी कर्मचारियों में भी इस बात की दहशत होगी कि यदि वे गड़बड़ करते हैं तो कल इसी तरह की कार्यवाही उनके खिलाफ भी हो सकती है.

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