टोक्यो/लखनऊ
टोक्यो में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भारतीय समुदाय के लोगों ने अत्यंत आत्मीयता के साथ स्वागत किया। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर प्रवासी भारतीयों के चेहरे खिल उठे। उनके आगमन पर टोक्यो एयरपोर्ट का पूरा वातावरण उत्साह, आत्मीयता और गर्वित भाव से भरा दिखाई दिया। प्रवासी भारतीयों ने जिस गर्मजोशी और भावनात्मक जुड़ाव के साथ उनका स्वागत किया, वह केवल औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि अपने देश-प्रदेश के प्रति गहरे लगाव का स्वाभाविक प्रदर्शन था।
मुख्यमंत्री के आगमन से पहले ही एयरपोर्ट के स्वागत स्थल पर पारंपरिक भारतीय परिधानों में सजे लोग बड़ी संख्या में एकत्र हो चुके थे। अधिसंख्य महिलाओं ने सलवार सूट या साड़ी पहनी थी तो पुरुष कुर्ता-पायजामे में नजर आए। कई लोगों ने भगवा रंग के परिधान धारण कर अपने सांस्कृतिक जुड़ाव को अभिव्यक्त किया। एक बच्ची ने भारतीय संस्कृति के अनुरूप मुख्यमंत्री के माथे पर तिलक लगाकर उनका अभिनंदन किया।
सीएम योगी को अपने बीच पाकर प्रवासी भारतीयों के चेहरों पर उत्साह साफ झलक रहा था। लोग मुख्यमंत्री की एक झलक पाने और उनके साथ तस्वीर लेने को आतुर दिखाई दिए। एक प्रवासी भारतीय ने मुख्यमंत्री को भारत-जापान के आध्यात्मिक संबंधों को दर्शाता एक विशेष पोस्टर भेंट किया, जिसमें दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक चिन्हों का उल्लेख था। एक अन्य महिला ने मुख्यमंत्री को हस्तनिर्मित पेंटिंग उपहार स्वरूप भेंट की, जो भावनात्मक सम्मान का प्रतीक बन गई।
टोक्यो आगमन पर यामानाशी प्रांत के वाइस गवर्नर जुनिचि इशिदरा ने भी मुख्यमंत्री की अगवानी की। यह स्वागत केवल एक शिष्टाचार भेंट नहीं, बल्कि भारत व जापान के बीच मजबूत होते रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों का प्रमाण भी था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जापान यात्रा दो देशों के आधिकारिक दौरे का हिस्सा है और जापान की उनकी पहली आधिकारिक यात्रा है। कई प्रवासी भारतीयों के लिए यह क्षण इसलिए भी खास रहा क्योंकि उन्होंने अपने गृह प्रदेश के मुख्यमंत्री को वैश्विक मंच पर उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते देखा।
प्रवासी समुदाय ने इस दौरे को उत्तर प्रदेश के विकास, निवेश और औद्योगिक सहयोग की संभावनाओं से जोड़कर देखा। उनके मन में यह विश्वास झलकता रहा कि यह यात्रा भारत व जापान के बीच आर्थिक और सांस्कृतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देगी। टोक्यो में सीएम योगी को मिला आत्मीय स्वागत इस बात का प्रमाण था कि भौगोलिक दूरी चाहे जितनी हो, दिलों के बीच कभी दूरी नहीं होती।





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