रांची.
झारखंड में जेल सुधार को लेकर राज्य सरकार ने व्यापक योजना तैयार की है। आगामी वित्तीय वर्ष में इस दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे, जिनमें नई जेलों का निर्माण, मौजूदा जेलों की मरम्मत और सुरक्षा व स्वास्थ्य सुविधाओं का आधुनिकीकरण शामिल है। सरकार ने इसके लिए योजना मद में करीब 120 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा है।
राज्य सरकार देवघर, लातेहार, गोड्डा, पाकुड़ और चतरा में नई जेलों के निर्माण हेतु इस वर्ष भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करेगी। उद्देश्य यह है कि जल्द से जल्द निर्माण कार्य प्रारंभ कर बढ़ती कैदी संख्या के दबाव को कम किया जा सके। वर्तमान में कई जेलें अपनी निर्धारित क्षमता से अधिक बंदियों को रखने के कारण भीड़भाड़ की समस्या से जूझ रही हैं। इसे देखते हुए अतिरिक्त वार्डों के निर्माण और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की योजना बनाई गई है।
मौजूदा जेलों का हो रहा विकास
मौजूदा जेलों में मरम्मत कार्य, चारदीवारी निर्माण, नए बंदी वार्ड, शौचालय और रसोईघर जैसी सुविधाओं को विकसित किया जाएगा। साथ ही जेलों में मानव संसाधन की कमी को दूर करने के लिए भी कदम उठाए जाने प्रस्तावित हैं। जेल आधुनिकीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके तहत इंटरेक्टिव एलईडी डिस्प्ले, प्रोजेक्टर और कंप्यूटर सिस्टम लगाए जाएंगे। स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए डिजिटल एक्स-रे मशीन, ईसीजी मशीन, हाइड्रोलिक बेड और स्ट्रेचर जैसे उपकरणों की खरीद की जाएगी। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सीसीटीवी कैमरे, इलेक्ट्रिक फेंसिंग, इलेक्ट्रॉनिक वार्ड बैरियर, गार्ड मानिटरिंग सिस्टम, आधुनिक लाकिंग सिस्टम, एक्सेस कंट्रोल और बायोमीट्रिक समाधान लागू किए जाएंगे। इसके अलावा मेटल डिटेक्टर, एक्स-रे बैगेज स्कैनर और नॉन-लिनियर जंक्शन डिटेक्टर भी खरीदे जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सुधार कार्य
जेल सुधार की प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में चल रही है। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 18 मई तक जेलों की अद्यतन रिपोर्ट मांगी है, जिसमें एक मार्च 2026 तक की स्थिति का विवरण देना अनिवार्य किया गया है। इस रिपोर्ट में जेलों की क्षमता, बंदियों की संख्या, भीड़भाड़ रोकने के उपाय, महिला कैदियों और उनके बच्चों के लिए सुविधाएं, तथा जेल कर्मियों की स्थिति जैसी जानकारियां शामिल होंगी।
कर्मचारियों की भारी कमी बनी चुनौती
राज्य की जेल व्यवस्था में मानव संसाधन की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पुरुष कक्षपाल के 1699 स्वीकृत पदों में से 1653 पद रिक्त हैं और मात्र 46 कर्मचारी कार्यरत हैं। इसी तरह महिला कक्षपाल के 104 स्वीकृत पदों में केवल 24 कार्यरत हैं, जबकि 80 पद खाली हैं। उच्च कक्षपाल के 244 पदों में से 32 रिक्त हैं और मुख्य उच्च कक्षपाल के तीन पदों में एक पद खाली है। विभिन्न श्रेणियों में कुल 1912 नए पद सृजित करने का प्रस्ताव फिलहाल सरकार के स्तर पर लंबित है।





Users Today : 49
Users This Month : 337
Total Users : 234262
Views Today : 81
Views This Month : 611
Total views : 56012



