Breaking News

संसद में दो-तिहाई बहुमत की तैयारी में BJP, स्टालिन को NDA में लाने की चर्चा तेज

चेन्नई

तमिलनाडु की सत्ता से द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) बाहर हो चुकी है और टीवीके प्रमुख थलपति विजय मुख्यमंत्री हैं. सत्ता के बदलने के साथ ही चेन्नई से लेकर दिल्ली तक की सियासत भी बदलती दिख रही है. डीएमके का साथ छोड़कर कांग्रेस ने विजय सरकार में शामिल हो गई है तो बीजेपी की कोशिश डीएमके के साथ हाथ मिलाने की है.  इस दिशा में सियासी एक्सरसाइज भी शुरू हो गई है। 

दक्षिण के तमिलनाडु की सियासत बदलते ही कांग्रेस ने डीएमके का साथ छोड़कर विजय के साथ हो गई. कांग्रेस के इस स्टैंड से एमके स्टालिन को गहरा झटका लगा है, जिसके बाद डीएमके ने विपक्षी इंडिया ब्लॉक से खुद को अलग कर लिया. अब मौके की नजाकत को देखते हुए बीजेपी ने डीएमके को एनडीए का हिस्सा बनाने की कवायद में जुट गई है। 

See also  छत्तीसगढ़ की धरती सदा से रही है साहित्य और संस्कृति की धरा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

सूत्रों के मुताबिक एनडीए की नजर डीएमके के 22 लोकसभा सांसदों और राज्यसभा के 8 सांसदों पर है. बताया जा रहा है कि मुद्दों के आधार पर डीएमके से बाहर से समर्थन की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं, क्योंकि एनडीए संसद में दो-तिहाई बहुमत की तलाश में है। 

डीएमके को एनडीए में लाने का प्लान
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद ही  डीएमके
ने कांग्रेस से रिश्ता तोड़ लिया है.  डीएमके ने बकायदा लोकसभा में कांग्रेस से अलग बैठने के लिए स्पीकर ओम बिरला को पत्र भी लिखा है. हालांकि, सनातन धर्म के मुद्दे पर डीएमके के सियासी रुख को देखते हुए औपचारिक गठबंधन की संभावना कम मानी जा रही है, लेकिन डीएमके का समर्थन हासिल करने के लिए एक अलग प्लानिंग की जा रही है। 

मोदी सरकार के रणनीतिकारों का मानना है कि बीजेडी, वाईएसआर कांग्रेस और बीआरएस की तरह ही डीएमके भी मुद्दों के आधार पर एनडीए को समर्थन दे सकती है. सूत्रों के मुताबिक, डीएमके में टूट से कोई बड़ा फायदा नहीं होगा, इसलिए सभी 22 सांसदों का समर्थन ज्यादा अहम माना जा रहा है. अटल बिहारी वाजपेयी के समय डीएमके एनडीए का हिस्सा रह चुकी है। 

See also  भोजशाला को अयोध्या मॉडल पर विकसित करने की तैयारी, Mohan Yadav का बड़ा बयान

दो-तिहाई बहुमत का नंबर जुटाने का दांव
बीजेपी संसद में 'दो-तिहाई बहुमत' का जादुई आंकड़ा जुटाने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी और चौंकाने वाले मिशन पर काम कर रही है. इस मिशन के तह तमिलनाडु की सत्ता से बाहर होने वाली डीएमके को एनडीए के पाले में लाने की है. डीएमके के 22 लोकसभा सांसद और 8 राज्यसभा सांसद है, जिनका समर्थन अगर बीजेपी हासिल कर लेती है तो संसद में दो-तिहाई वाले बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंच सकती है। 

हाल ही में संसद में परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान यह साफ हो गया कि साधारण बहुमत होने के बावजूद भाजपा बड़े संवैधानिक बदलावों के लिए दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े से थोड़ी दूर रह गई थी। 

See also  NEET पेपर लीक पर शिक्षा मंत्री का बड़ा बयान, बोले- रक्षक ही भक्षक बने, पेपर बनाने वाले ही बदमाशों से मिले

वन नेशन-वन इलेक्शन, परिसीमन और न्यायिक सुधार जैसे बड़े ऐतिहासिक फैसलों को बिना किसी संवैधानिक अड़चन के पास कराने के लिए सरकार को लोकसभा और राज्यसभा दोनों में दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन चाहिए। 

एनडीए बहुमत में है, लेकिन दो-तिहाई बहुमत (360+ सीटें) से दूर है. ऐसे में सांसदों के साथ आने से दो-तिहाई का आंकड़ा बेहद आसान हो जाएगा. ऐसे में बीजेपी की कोशिश है कि डीएमके को किसी न किसी तरह साथ लाया जाए, उससे लिए सीधे हाथ मिलाने के बजाय पर्दे के पीछे से समर्थन हासिल करने की है। 

Author:

Facebook
Twitter
LinkedIn

Related Posts

Verified by MonsterInsights