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ट्विशा केस में नए खुलासे: रस्सी AIIMS नहीं भेजी गई, SI की कार में रखी रही; जांच पर उठे सवाल

भोपाल
 एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा डेथ केस की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) अब मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। इस बीच, सीबीआई जांच से पहले हुई स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतका की सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह द्वारा जबलपुर हाईकोर्ट में पेश किए गए दस्तावेजों से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि जांच से जुड़े बेहद गोपनीय और अहम तथ्य पहले ही उन तक पहुंच रहे थे। इसी का फायदा उठाकर वह समय रहते अग्रिम जमानत लेने में कामयाब हो गई थीं, जिसे बाद में 27 मई को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था।

शुरुआती जांच में पुलिस की बड़ी लापरवाही
ट्विशा के परिजनों की ओर से भोपाल कोर्ट में पैरवी कर रहे एडवोकेट अंकुर पांडे का आरोप है कि शुरुआत में ही मृतका की सास गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह को संदिग्ध माना जाना चाहिए था, लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया। मामले से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, 13 मई 2026 की सुबह सब इंस्पेक्टर (SI) दिनेश शर्मा ने फंदे की रस्सी तो जब्त की, लेकिन लिखापढ़ी में उस व्यक्ति का स्पष्ट विवरण ही दर्ज नहीं किया गया जिसने रस्सी की पहचान की थी। इसके अलावा, उस महत्वपूर्ण रस्सी को तुरंत फॉरेंसिक जांच के लिए एम्स अस्पताल भेजने के बजाय सब इंस्पेक्टर ने अपनी निजी कार में रख दिया था और बाद में उसे जांच के लिए भेजा गया। इतनी बड़ी लापरवाही के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

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इसके अलावा, केस डायरी का हिस्सा रहे जब्ती से जुड़े दस्तावेज भी आरोपियों तक पहुंच गए थे। कानूनी नियमों के मुताबिक, उस समय समर्थ और गिरिबाला आरोपी नहीं थे, इसलिए उन्हें इन दस्तावेजों को देखने का कोई अधिकार नहीं था। इसके बावजूद अग्रिम जमानत याचिका के साथ इन गोपनीय दस्तावेजों को अदालत में दाखिल कर दिया गया, जिससे साफ है कि जांच की जानकारी लीक हो रही थी।

मनोचिकित्सक से पूछताछ और मेडिकल पर्चे की जांच
केस को आगे बढ़ाते हुए सीबीआई की टीम ने अब ट्विशा का इलाज करने वाले प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉक्टर सत्यकांत त्रिवेदी से विस्तृत पूछताछ की है। दरअसल, आरोपी पक्ष ने भोपाल कोर्ट में कुछ ऐसे मेडिकल दस्तावेज पेश किए थे, जिनमें दावा किया गया था कि ट्विशा मानसिक रूप से परेशान थी और उसका मनोरोग का इलाज चल रहा था।

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सीबीआई अब इन मेडिकल पर्चों की असलियत खंगाल रही है। जांच एजेंसी ने डॉक्टर से पूछा कि ट्विशा कब-कब इलाज के लिए आई थी, उसे क्या समस्याएं थीं और काउंसलिंग के दौरान उसने अपनी निजी जिंदगी को लेकर क्या बातें साझा की थीं। इस पूछताछ पर डॉक्टर सत्यकांत त्रिवेदी ने सीबीआई से संपर्क की पुष्टि की है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि मरीज की गोपनीयता और उसके अधिकारों को देखते हुए वह काउंसलिंग की व्यक्तिगत बातों का खुलासा सार्वजनिक रूप से नहीं कर सकते।

पूर्व जज की सुरक्षा को लेकर जेल प्रशासन अलर्ट
मामले में गिरफ्तारी के बाद 29 मई को रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को भोपाल की स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया था, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। शुरुआत में दोनों को जेल के अस्पताल वार्ड में वीआईपी ट्रीटमेंट मिलने के आरोप लगे थे, जिसके बाद जेल प्रबंधन ने उन्हें सामान्य बैरक में शिफ्ट कर दिया है।

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अदालत के निर्देश के बाद जेल में गिरिबाला सिंह की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। उनकी बैरक के पास अतिरिक्त प्रहरियों की तैनाती के साथ ही सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ा दी गई है। सुरक्षा बढ़ाने की मुख्य वजह यह है कि गिरिबाला सिंह जब 15 जुलाई 2021 से 28 फरवरी 2023 तक भोपाल जिला कोर्ट में जज के पद पर तैनात थीं, तब उन्होंने जिन अपराधियों को सजा सुनाई थी, उनमें से 29 कैदी वर्तमान में इसी जेल में बंद हैं। ऐसे में किसी भी अनहोनी या आपसी रंजिश की आशंका को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है।

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