आपने अनगिनत बार सुना होगा कि अच्छे बनो, सबका भला सोचो, धैर्य रखो. लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि अच्छे लोग सिर्फ कहानियों की किताबों में जीतते हैं, असल जिंदगी में नहीं. यह बात आपको अभी गलत लग रही होगी, लेकिन यही वह सच है जिससे कोई बच नहीं सकता है. दुनिया में वही लोग आगे बढ़ते हैं, जो समय के साथ अपनी सोच और नीति बदलना जानते हैं.
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि अगर सच्ची सफलता चाहिए, तो सिर्फ अच्छाई नहीं, नीति भी सीखनी पड़ेगी. यानी जरूरत पड़ने पर बुरा बनने का साहस भी रखना होगा, वरना दुनिया आपको कुचलकर आगे बढ़ जाएगी.
अच्छाई कब बन जाती है कमजोरी?
यह दुनिया मासूमों की नहीं, समझदारों की है. यहां अच्छाई को अक्सर कमजोरी, डर और इस्तेमाल करने लायक स्वभाव समझ लिया जाता है. लोग आपकी शांति को आपकी सीमा समझ लेते हैं. आपके त्याग को मूर्खता कह देते हैं. आपकी चुप्पी को आपकी हार मान लेते हैं लेकिन चाणक्य कहते हैं कि, 'जो समय की चाल नहीं समझता, उसका अच्छा चरित्र भी उसे नहीं बचा सकता.'
चाणक्य का सूत्र
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि, 'अगर हर कोई आपसे खुश है, तो समझिए आपने कहीं न कहीं खुद से गद्दारी की है.' सबको खुश रखना सफलता नहीं है. असली जीत तब है जब आप सही के लिए अकेले खड़े हो सकें.
तीन गुण जो हर व्यक्ति में जरूरी हैं
लोमड़ी जैसी चालाकी- ताकि कोई आपकी मासूमियत का फायदा न उठा सके.
कौवे जैसी बुद्धि- कब बोलना है और कब चुप रहना है.
शेर जैसी निडरता- जरूरत पड़े तो दहाड़ सको.
चाणक्य की सबसे बड़ी सीख
अगर आप सांप हैं, तो जहर मत फैलाइए, लेकिन इतना जरूर दिखाइए कि आपके पास जहर है. यानी कि शांत रहिए, लेकिन कमजोर मत दिखिए, माफ कीजिए, लेकिन भूलिए मत, कम बोलिए, लेकिन सटीक बोलिए.
श्रीकृष्ण से सीख
जरा सोचिए कि श्रीकृष्ण अच्छे थे या बुरे? क्योंकि उन्होंने छल भी किया, रणनीति भी बनाई. लेकिन धर्म की रक्षा के लिए. वहीं दुर्योधन ने भी वही किया, लेकिन अपने अहंकार के लिए. दोनों की नीयत में फर्क था. इसलिए श्रीकृष्ण पूजे जाते हैं और दुर्योधन नकारे गए.
असली समस्या क्या है?
अच्छे लोग एक मानसिक जाल में फंस जाते हैं वे सबकी मदद करते हैं. खुद को पीछे रखते हैं और अंत में सबसे ज्यादा थके और टूटे हुए होते हैं. क्योंकि दुनिया आपकी अच्छाई नहीं, आपकी उपलब्धता देखती है.
चाणक्य का गुरु मंत्र
– लोगों के शब्द नहीं, उनकी नीयत पढ़ो.
– जितना मीठा कोई बोले, उतना सतर्क रहो.
– दूसरों की चाल समझो, अपनी चाल मत खोलो.
– माफ करो, लेकिन सबक मत भूलो.
– खुद को इतना मजबूत बनाओ कि कोई आपको तोड़ न सके.





Users Today : 7
Users This Month : 22
Total Users : 239400
Views Today : 7
Views This Month : 26
Total views : 62838



