Breaking News

मधुबनी के बलिराजगढ़ में बड़ी खोज, खुदाई में मिले प्राचीन अवशेष और संरचनाएं

पटना
 बिहार का मधुबनी जिला इन दिनों चर्चा में है। दररअसल मधुबनी जिले में स्थित ऐतिहासिक बलिराजगढ़ उत्खनन स्थल से अनेक बहुमूल्य संरचनात्मक अवशेष और प्राचीन वस्तुएं पूरा शेष प्राप्त हुई हैं। यह जानकारी जनता दल (यूनाइटेड) यानी जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष सांसद एवं पर्यटन, परिवहन तथा संस्कृति संबंधी संसदीय स्थाई समिति के अध्यक्ष संजय कुमार झा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दी है। संजय झा ने अधिकारियों से प्राप्त विस्तृत जानकारी साझा करते हुए लिखा है कि बलिराजगढ़ पुरातात्विक स्थल पर वर्तमान में चल रही खुदाई मुख्य रूप से दो हिस्सों- किले की दीवार और उसके दक्षिणी क्षेत्र में केंद्रित है।

See also  अबूझमाड़ में हथियार फैक्ट्री और विस्फोटक जखीरा बरामद, नक्सलियों के डंप पर बड़ी कार्रवाई

उन्होंने बताया है कि बलिराजगढ़ में उत्खनन के दौरान प्राचीन ईंटों की दीवार, 7 परतों वाली ईंटों की संरचना, आंगन, फर्श, रिंग वेल-कुआं और विशेष जल निकासी प्रणाली के साथ सोख्ता गड्ढा आदि मिले हैं। इसके साथ ही विभिन्न आकृतियों के बर्तन, सिक्के, मुहरें, मिट्टी की मूर्तिया, खिलौने और पत्थर की गेंदें भी मिली हैं। यह इस क्षेत्र के विभिन्न सांस्कृतिक चरणों और प्राचीन समृद्ध जीवनशैली को दर्शाती हैं। यहां फिलहाल एएसआई का दफ्तर खोलने पर काम चल रहा है। बताया ज रहा है कि यहां अगले 10 सालों तक खुदाई होगी।

संजय झा ने बलिराजगढ़ में हो रही खुदाई की प्रगति के संबंध में शनिवार को केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सचिव से बात की। सचिव द्वारा उन्हें बताया गया कि मंत्रालय बलिराजगढ़ में आगामी 10 वर्षों तक निरंतर खुदाई कराने, वहां एएसआई का कार्यालय खोलने और एक संग्रहालय के निर्माण पर आगे की कार्रवाई कर रहा है। इससे पहले उन्होंने इस सिलसिले में गत 19 मई को नई दिल्ली में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात कर बलिराजगढ़ के संरक्षण और वैज्ञानिक उत्खनन के संबंध में विस्तृत चर्चा की थी।

See also  आईसीसी 2027-29 के डब्ल्यूटीसी चक्र में बदल जाएगा टेस्ट क्रिकेट!, 5 के बजाय 4 दिन और 90 के बजाय 98 ओवर

पर्यटन और आर्थिक विकास की संभावनाएं
रामायण सर्किट और मिथिला पर्यटन में इस स्थल के पूर्ण उत्खनन से यह बिहार में रामायण सर्किट और सांस्कृतिक पर्यटन का एक बहुत बड़ा केंद्र बन सकता है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास होगा। पर्यटकों को यह जगह काफी पसंद आ सकती है।

खुदाई में हाई-टेक उपकरणों का इस्तेमाल
एक खास बात यह भी है कि इस बार की खुदाई में पिछली बाधाओं (जैसे भूजल स्तर का ऊपर आना) से निपटने के लिए सैटेलाइट इमेजिंग, जीपीएस मैपिंग और आधुनिक वैज्ञानिक ट्रेंचिंग का उपयोग किया जा रहा है।

Author:

Facebook
Twitter
LinkedIn

Related Posts

Verified by MonsterInsights