नई दिल्ली
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधी रात से अपने 60 व्यापार सहयोगियों पर टैरिफ का बम फोड़ दिया है। जबरन मजदूरी का आरोप लगाते हुए अमेरिका ने भारत समेत 60 ट्रेड पार्टनर्स पर 10 या फिर 12.5 फीसदी का टैरिफ लगाया है। टैरिफ को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मात खाने के बाद भी डोनाल्ड ट्रंप ने इन देशों से आयात पर शुल्क लगाया है। उन्होंने यह भी कहा कि महीनेभर की चर्चा के बाद यह टैरिफ लगाया गया है। इसके सामने कोई कानूनी चुनौती भी नहीं है। अमेरिका ने इजरायल को भी बख्शा नहीं है और उसपर 12.5 फीसदी का टैरिफ लगाया है। जबकि अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान के खिलाफ युद्ध भी लड़ रहे हैं।
वाइट हाउस ने अपने आदेश में कहा है कि चीन, यूके और जापान जैसे देश जिनके पास जबरन मजदूरी को रोकने का कोई कानून नहीं है, उनपर 12.5 फीसदी का टैरिफ लगाया जा रहा है। इसके अलावा भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश. यूरोपीय यूनियन पर 10 फीसदी का टैरिफ लगाया गया है। अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत इन देशों से तेल और गैस के आयात पर कोई शुल्क नहीं लगाया गया है।
बता दें कि इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने जो 10 फीसदी का अस्थायी टैरिफ ळगाया था, उसकी मियाद गुरुवार रात ही खत्म हो रही थी। इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने नए टैरिफ का ऐलान कर दिया। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि अमेरिका करीब 100 साल से जबरन मजदूरी का विरोधी रहा है और अपनी पुरानी नीतियों के तहत ही यह फैसला लिया गया है। अमेरिका ने कहा कि मजदूरों की स्थिति सुधारने के लिए और मानवाधिकारों की रक्षा करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
भारत पर क्यों 10 फीसदी का टैरिफ
अमेरिका ने भारत पर कुल 10 फीसदी का टैरिफ लगाया गया है। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप ने पहले भारत पर 12.5 फीसदी टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। अब वाइट हाउस की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि कंबोडिया गुआतेमाला, होंडुरस, भारत, श्रीलंका, त्रिनिदाद,ने जबरन मजदूरी पर प्रतिबंध लगाने को लेकर प्रतिबद्धता जताई है।ऐसे में इन देशों ने कहा कि जबरन मजदूरी को रोकने की दिशा में सार्थक कदम उठाने और उत्साहवर्धन करने के लिए उनपर ज्यादा टैरिफ ना लगाया जाए।
अमेरिका का 1974 का ट्रेड ऐक्ट का सेक्शन 301उन ट्रेड पारन्टर्स के खिलाफ टैरिफ लगाने की छूट देता है जो कि गलत तरीके से ट्रेड करते हैं। अधिकारियों के हवाले से एएनआई ने बताया है कि पहले अमेरिका भारत पर भी 12.5 फीसदी टैरिफ लगाने वाला था लेकिन लेबर प्रैक्टिस को लेकर सकारात्मक बातचीत के बाद भारत को राहत मिल गई है।





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