जबलपुर
प्रमोशन में आरक्षण को लेकर मंगलवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि कर्मचारियों को प्रमोशन दिया जा सकता है, लेकिन आरक्षण की 50 प्रतिशत निर्धारित सीमा का उल्लंघन नहीं।
हाईकोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि इस मामले या सुप्रीम कोर्ट में लंबित आरबी राय और जरनैल सिंह मामलों में फैसला आने तक प्रमोशन में आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा का सख्ती से पालन हो।
अदालत ने कहा- प्रमोशन के लिए विचार का अधिकार, लेकिन आरक्षण की सीमा जरूरी
सुनवाई के दौरान भोपाल की वेटरनरी सर्जन डॉ. स्वाति तिवारी सहित अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर बहस हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से कर्मचारियों को लगातार प्रमोशन दिए जा रहे हैं। एक बार प्रमोशन मिलने के बाद संबंधित कर्मचारियों को बाद में पदावनत यानी रिवर्ट करना व्यावहारिक रूप से मुश्किल हो जाता है।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने आरबी राय मामले का हवाला देते हुए कहा कि स्पष्ट कानूनी स्थिति होने के बावजूद अब तक प्रभावित कर्मचारियों को रिवर्ट नहीं किया गया है।
इंद्रा साहनी फैसले का हवाला
डिवीजन बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ फैसले में निर्धारित 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा का उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि कर्मचारियों को प्रमोशन के लिए विचार किए जाने का अधिकार है, लेकिन आरक्षण की निर्धारित 50 प्रतिशत ऊपरी सीमा का पालन भी जरूरी है। इसे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पार नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि लंबित मामलों में अंतिम निर्णय आने तक प्रमोशन प्रक्रिया में 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। मामले की अगली सुनवाई 1 दिसंबर को होगी।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और अतिरिक्त महाधिवक्ता जान्हवी पंडित ने सरकार का पक्ष रखा।





Users Today : 6
Users This Month : 69
Total Users : 236927
Views Today : 8
Views This Month : 115
Total views : 59593



