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भारत नॉर्थ कोरिया की बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण से खफा ,उठाये सख्त कदम

  नई दिल्ली

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत ने एक बार फिर नॉर्थ कोरिया की बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण पर चिंता जताई है. भारत ने कहा कि नॉर्थ कोरिया के इस कदम का असर क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर पड़ेगा. बैठक में भारत ने कोरियाई प्रायदीप को परमाणु मुक्त बनाने के लिए अपना समर्थन एक बार फिर दोहराया. एक महीने में यह दूसरी बार है, जब नॉर्थ कोरिया के इस कदम की भारत ने आलोचना की है. भारत ने इसे सामूहिक हित के मद्देनजर बताते हुए कहा कि किसी भी मुद्दे को सुलझाने का सबसे अच्छा तरीका बातचीत और कूटनीति है.

गौरतलब है कि नॉर्थ कोरिया ने शुक्रवार को इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का परीक्षण कर एक बार फिर विवाद छेड़ दिया है. अमेरिका और उसके सहयोगी लगातार नॉर्थ कोरिया को चेतावनी भी दे रहे हैं लेकिन उत्तरी कोरियाई शासक किम जोंग उन पर इसका कुछ असर नहीं हो रहा है. वो लगातार अपनी मर्जी चलाते हुए मिसाइलों के परीक्षण को आगे बढ़ा रहे हैं.

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अमेरिका, भारत समेत 14 देशों ने की निंदा
नॉर्थ कोरिया ने शुक्रवार को जिस मिसाइल का टेस्ट किया, वो करीब 200 किलोमीटर दूर जापान कोस्टलाइन में जाकर गिरी. इस मिसाइल टेस्ट के बाद हुई यूएनएससी बैठक में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और भारत समेत 14 अन्य देशों ने नॉर्थ कोरिया की कड़ी निंदा की.

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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहीं रुचिका कंबोज ने न्यूक्लियर और मिसाइल तकनीक के बढ़ते प्रसार पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि नॉर्थ कोरिया की मिसाइल टेस्टिंग पर इस महीने में हो रही यह दूसरी मीटिंग है. कंबोज ने कहा कि भारत पूरी तरह से नॉर्थ कोरिया की ओर से लॉन्च की गई बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) की निंदा करता है.

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संयुक्त राष्ट्र के नियमों का उल्लंघन है यह परीक्षण

भारतीय प्रतिनिधि रुचिका कंबोज ने आगे कहा कि नॉर्थ कोरिया का यह कदम संयुक्त राष्ट्र के नियमों का उल्लंघन है. नॉर्थ कोरिया ना सिर्फ इस क्षेत्र की बल्कि उसके बाहर भी शांति और सुरक्षा पर असर डाल रहा है.

रुचिका कंबोज ने कहा कि परमाणु और मिसाइल तकनीक का प्रसार चिंता का विषय है क्योंकि ये शांति और सुरक्षा को प्रभावित करता है और भारत भी इससे अछूता नहीं है.

नॉर्थ कोरिया का यह कदम अंतराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा

कंबोज ने कहा कि हमें आशा है कि इस मामले में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय और सुरक्षा परिषद एक होकर आगे बढ़ेंगे.

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वहीं सुरक्षा परिषद की बैठक में सभी देशों ने संयुक्त बयान देते हुए कहा कि नॉर्थ कोरिया का यह कदम अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए स्पष्ट खतरा है.

बता दें कि साल 2006 में जब नॉर्थ कोरिया ने पहला परमाणु परीक्षण किया था तो यूएनएससी ने उस पर प्रतिबंध लगाए थे. इसके बाद लगातार उस पर प्रतिबंध को कड़ा किया जा रहा था.

हालांकि इसी साल मई महीने में चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उस प्रस्ताव को रोक दिया जिसके जरिए मिसाइल परीक्षण करने पर प्रतिबंध और सख्त किए जाने थे. यूएनएससी में ऐसा पहली बार हुआ था जब नॉर्थ कोरिया के खिलाफ लगाए जा रहे प्रतिबंधों पर सदस्यों के बीच दरार देखी गई थी.

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