नई दिल्ली
केंद्र सरकार ने कर्ज के बोझ से दबी टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया को एक बड़ी राहत दी है। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को एक विशेष राहत पैकेज को मंजूरी दी, इसके तहत कंपनी के एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) बकाये को 87,695 करोड़ रुपये पर फ्रीज कर दिया गया है। सरकार के इस फैसले का टेलीकॉम सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बनाए रखना और वोडाफोन आइडिया में सरकार की 49% हिस्सेदारी के मूल्य की रक्षा करना है।
भुगतान का नया शेड्यूल किया गया जारी
कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए इस पैकेज के अनुसार, वोडाफोन आइडिया को इस फ्रीज किए गए बकाये का भुगतान तत्काल नहीं करना होगा। सूत्रों ने जानकारी दी है कि ₹87,695 करोड़ के इस बकाये का भुगतान वित्त वर्ष 2031-32 (FY32) से वित्त वर्ष 2040-41 (FY41) के बीच किया जाना है। AGR बकाया राशि को 31 दिसंबर, 2025 की स्थिति के अनुसार फ्रीज किया गया है।
दूरसंचार विभाग (DoT) इस बकाये की राशि का फिर से आकलन करेगा ताकि सटीकता सुनिश्चित की जा सके। राहत के बावजूद, कंपनी को कुछ भुगतानों के लिए मौजूदा समयसीमा का पालन करना होगा। सूत्रों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2017-18 और 2018-19 से संबंधित AGR बकाये के भुगतान की शर्तों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह राशि वोडाफोन आइडिया को वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 के बीच पूर्व-निर्धारित किस्तों में चुकानी होगी।
सरकार की हिस्सेदारी और बाजार में प्रतिस्पर्धा बचाए रखने की कवायद
सरकार फिलहाल वोडाफोन आइडिया में सबसे बड़ी शेयरधारक है, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 49% है। सूत्रों का कहना है कि कैबिनेट के इन कदमों का उद्देश्य न केवल सरकारी निवेश को सुरक्षित करना है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि देश का टेलीकॉम बाजार ‘डुओपॉली’ (केवल दो कंपनियों का वर्चस्व) बनने से बचा रहे। राहत पैकेज से कंपनी को अपनी सेवाओं के विस्तार, विशेषकर 5G रोलआउट और नेटवर्क अपग्रेडेशन के लिए जरूरी पूंजी जुटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कैबिनेट का यह फैसला ऐसे समय पर सामने आया है जब वोडाफोन- आइडिया लंबे समय से वित्तीय संकट और ग्राहकों की घटती संख्या से जूझ रही है। अक्तूबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट की ओर से एजीआर बकाये के पुनर्मूल्यांकन को सरकार के नीतिगत दायरे में बताया गया था। उसके बाद से ही सरकार की ओर से राहत देने की खबर सामने आने की उम्मीद थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि बकाये के भुगतान में पांच साल से अधिक की अतिरिक्त मोहलत मिलने से कंपनी के कैश फ्लो में सुधार होगा। हालांकि, कंपनी की लंबी अवधि की स्थिरता अब इस बात पर निर्भर करेगी कि वह आने वाले महीनों में नए निवेशकों से कितनी जल्दी फंड जुटा पाती है और अपने औसत प्रति ग्राहक राजस्व यानी एआरपीयू में कितना इजाफा कर पाती है।
कैबिनेट ने ₹20,668 करोड़ के सड़क परियोजनाओं को दी मंजूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से दो प्रमुख सड़क परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी है। इन परियोजनाओं पर कुल 20,668 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा, जिससे महाराष्ट्र और ओडिशा में कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी।
कैबिनेट का सबसे बड़ा फैसला महाराष्ट्र के लिए रहा, जहां 374 किलोमीटर लंबे नासिक-सोलापुर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के निर्माण को मंजूरी दी गई है। इस 6-लेन कॉरिडोर के निर्माण पर 19,142 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह कॉरिडोर न केवल यात्रा के समय को कम करेगा, बल्कि नासिक और सोलापुर जैसे औद्योगिक और कृषि केंद्रों के बीच लॉजिस्टिक्स दक्षता को भी बढ़ाएगा। ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट होने के कारण यह पूरी तरह से नए एलाइनमेंट पर विकसित किया जाएगा, जिससे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में यातायात का दबाव कम होगा।
इसके अलावे, कैबिनेट ने ओडिशा में सड़क नेटवर्क को अपग्रेड करने के लिए 1,526 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दी है। राष्ट्रीय राजमार्ग-326 (NH-326) के 206 किलोमीटर लंबे हिस्से का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। यह परियोजना राज्य के आंतरिक क्षेत्रों में माल ढुलाई को सुगम बनाएगी और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बेहतर करेगी।





Users Today : 5
Users This Month : 33
Total Users : 233571
Views Today : 5
Views This Month : 53
Total views : 54812



