नई दिल्ली
केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी राहत की खबर है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) ने मेडिकल रीइम्बर्समेंट यानी इलाज के खर्च की प्रतिपूर्ति की अधिकतम सीमा बढ़ा दी है। अब मंत्रालयों/विभागों के हेड ऑफ डिपार्टमेंट 10 लाख रुपये तक के मेडिकल क्लेम बिना इंटीग्रेटेड फाइनेंस डिविजन (IFD) से सलाह लिए मंजूर कर सकेंगे। पहले यह सीमा 5 लाख रुपये थी। यह फैसला 16 फरवरी 2026 को जारी ऑफिस मेमोरेंडम (OM) के जरिए बताया गया है।
क्या है डिटेल
मंत्रालय ने एक और अहम बदलाव किया है। जिन मामलों में किसी तरह के नियमों में छूट (relaxation) नहीं दी जाती और पूरा भुगतान तय CGHS रेट्स के हिसाब से होता है, ऐसे मामलों में निपटान की सीमा 2 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है। यानी अगर क्लेम पूरी तरह नियमों के तहत है और दरें स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (CGHS) के मुताबिक हैं, तो अब ज्यादा राशि का भुगतान आसान होगा। इससे कर्मचारियों को लंबे इंतजार और फाइलों की देरी से राहत मिलने की उम्मीद है।
हालांकि 10 लाख रुपये की नई सीमा के साथ दो साफ शर्तें भी जोड़ी गई हैं। पहली, क्लेम में CGHS या CS(MA) नियमों में कोई ढील नहीं दी जाएगी। दूसरी, रीइम्बर्समेंट की रकम पूरी तरह CGHS/CS(MA) की तय दरों के अनुसार ही होगी। मतलब साफ है—अगर अस्पताल का बिल तय रेट से ज्यादा है और नियमों में छूट चाहिए, तो मामला पहले की तरह उच्च स्तर पर ही जाएगा। मंत्रालय ने अपने पुराने 23 नवंबर 2016 के आदेश का भी जिक्र किया है, जिसमें बिना नियमों में छूट वाले मामलों की सीमा 2 लाख से बढ़ाकर 5 लाख की गई थी।
कहां होता है आवेदन
CGHS मेडिकल क्लेम की प्रक्रिया भी साफ कर दी गई है। पेंशनर्स को इलाज या डिस्चार्ज के छह महीने के भीतर अपने वेलनेस सेंटर के CMO के पास आवेदन देना होता है। इसके साथ मेडिकल रीइम्बर्समेंट क्लेम फॉर्म, चेकलिस्ट, डिस्चार्ज समरी की कॉपी, रेफरल/परमिशन स्लिप, इमरजेंसी सर्टिफिकेट (यदि लागू हो), अस्पताल के ओरिजिनल बिल और रसीदें, वैध CGHS कार्ड की कॉपी और बैंक डिटेल्स के लिए कैंसल चेक या मंडेट फॉर्म जमा करना जरूरी है। दस्तावेज पूरे और सही होने पर प्रक्रिया तेज हो जाती है।
जहां तक एंबुलेंस खर्च का सवाल है, वह भी रिइम्बर्सेबल है, लेकिन एक शर्त के साथ। शहर के भीतर एंबुलेंस का खर्च तभी मिलेगा, जब इलाज करने वाले डॉक्टर का प्रमाण पत्र हो कि किसी और माध्यम से ले जाने पर मरीज की जान को खतरा था या हालत और बिगड़ सकती थी। कुल मिलाकर, सरकार के इस फैसले से मेडिकल क्लेम की मंजूरी में तेजी आएगी और कर्मचारियों-पेंशनर्स को बड़ी रकम के मामलों में भी राहत मिलेगी।





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