जबलपुर। 6 साल बीतने को हैं कैंट बोर्ड मेंबर्स चुनाव नहीं कराए गए हैं। 10 फरवरी को रक्षा मंत्रालय ने एक बार फिर अधिसूचना जारी करते हुए बोर्ड भंग रखे जाने की मियाद एक साल बढ़ा दी है। वहीं जिन कैंट बोर्ड में नामांकित मेंबर्स की तैनाती की गई है उनका कार्यकाल भी एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया है। लेकिन देशभर के तमाम कैंटोनमैंट बोर्ड में पिछले करीब 6 वर्षों से चुनाव नहीं कराए गए हैं, जिसके चलते लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
आम नागरिक अपने छोटे कामों को लेकर परेशान है तो वहीं राजनैतिक दल अब पूछ परख नही होने से बैचेनी बढ़ती जा रही है। इसी के चलते अब कैंट बोर्ड के पूर्व मेंबर्स हाई कोर्ट का रूख कर रहे हैं। जबलपुर हाईकोर्ट में चुनावों को लेकर एक याचिका लंबित है। वहीं अब दिल्ली हाईकोर्ट में चुनाव कराए जाने को लेकर एक याचिका दाखिल की गई है।
जिसकी सुनवाई को दौरान कोर्ट को बताया गया कि वर्ष 2015 में हुए चुनावों के बाद बोर्ड का कार्यकाल 2020 में समाप्त हो गया था, लेकिन इसके बावजूद अब तक नए चुनाव नहीं करवाए गए। चुनाव न होने के कारण बोर्ड का प्रशासनिक कामकाज लंबे समय से नॉमिनेट सदस्यों और अधिकारी चला रहे हैं।
इस बीच रक्षा मंत्रालय की ओर से देशभर के कैंटोनमेंट बोडों को नगर निगमों में मर्ज करने की योजना के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर लैंड का ड्रोन सर्वे भी करवाया गया था, लेकिन न तो मर्ज की प्रक्रिया पूरी हो सकी और न ही चुनाव करवाए गए।
दायर की गई याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार को फटकार लगाई है और पूछा है कि पिछले कई वर्षों से कैंटोनमेंट बोर्ड के चुनाव क्यों नहीं कराए गए। कोर्ट ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में लंबे समय तक बिना चुनाव के प्रशासन चलाना उचित नहीं है।
इसी के चलते हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार तथा रक्षा संपदा अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है जिसकी अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी। सूत्रों के अनुसार इस मुद्दे को लेकर हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका जिसमें कैंटोनमेंट बोडों के चुनाव जल्द करवाने की मांग की गई है।





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