लखनऊ
उत्तर प्रदेश ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्य कर विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में प्रदेश नेट कलेक्शन के आधार पर देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। पोस्ट सेटलमेंट वृद्धि के मामले में राज्य ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है।
जारी आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश को एसजीएसटी और आईजीएसटी से कुल 84.80 हजार करोड़ रुपये मिले। इसमें से 2.37 हजार करोड़ रुपये की रिकवरी के बाद नेट संग्रह 82.42 हजार करोड़ रुपये रहा। इस आधार पर उत्तर प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर रहा। महाराष्ट्र 1.84 लाख करोड़ रुपये के नेट संग्रह के साथ पहले स्थान पर है। मार्च 2026 में राज्य का संग्रह 7.53 हजार करोड़ रुपये रहा। यह पिछले वर्ष की तुलना में आठ प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि मजबूत आर्थिक गतिविधियों का संकेत है।
नेट संग्रह की स्थिति
वित्त वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश का एसजीएसटी और आईजीएसटी कलेक्शन 82.42 हजार करोड़ रुपये रहा। यह महाराष्ट्र के 1.84 लाख करोड़ रुपये के बाद दूसरा सबसे बड़ा संग्रह है। कर्नाटक का नेट संग्रह 81.06 हजार करोड़ रुपये रहा। गुजरात का नेट संग्रह 73.17 हजार करोड़ रुपये और तमिलनाडु का 72.97 हजार करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
वृद्धि दर में अग्रणी प्रदर्शन
उपभोक्ता आधारित राज्यों में उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन वृद्धि के मामले में सबसे बेहतर रहा है। मार्च 2026 में राज्य के संग्रह में आठ प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे कई राज्यों में गिरावट आई। जीएसटी संग्रह में यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर व्यापार और उपभोग से जुड़ी है। जीएसटी 2.0 में करों में कटौती के बावजूद उत्तर प्रदेश का कर संग्रह बढ़ा है।
राज्यकर आयुक्त डॉ. नीतिन बंसल का कहना है कि जीएसटी संग्रह में बढ़ोतरी सीधे तौर पर व्यापार और उपभोग से जुड़ी होती है। जीएसटी 2.0 में आम लोगों को राहत के लिए करो में कटौती के बावजूद उत्तर प्रदेश का कर संग्रह बढ़ा है। जबकि उपभोक्ता आधारित अन्य राज्यों में नकारात्मक ग्रोथ है। वर्तमान वित्त वर्ष में इसे और बढ़ाने के लिए विभाग कई नए प्रयास कर रहा है। कई नई शुरुआत कर रहा है जिसका असर जल्द सामने आएगा।





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