Breaking News
[the_ad id='4127']
[the_ad id="4127"]

लोक संगीत के संरक्षण में योगदान पर डॉ. बड़ाईक सम्मानित, रांची में समारोह आयोजित

रांची
 झारखंड के नागपुरी लोक संगीत जगत के प्रख्यात गायक डॉ. लक्ष्मीकांत नारायण बड़ाईक को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित “गुरु रत्न सम्मान” से सम्मानित किया गया है. यह सम्मान उन्हें 14 अप्रैल को “भारत के गवैयों” संस्था की ओर से प्रदान किया गया. डॉ. बड़ाईक को यह गौरव नागपुरी लोक संगीत के संरक्षण, संवर्धन और इसे वैश्विक मंचों तक पहुंचाने में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया है. इस सम्मान समारोह ने झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को एक नई मजबूती प्रदान की है.

सांसद महुआ माजी ने की कलाकार की सराहना
इस भव्य आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में राज्यसभा सांसद महुआ माजी उपस्थित रहीं. उन्होंने डॉ. बड़ाईक को सम्मानित करते हुए कहा कि ऐसे वरिष्ठ कलाकार हमारी संस्कृति और परंपरा के सच्चे संवाहक होते हैं. महुआ माजी ने अपने संबोधन में जोर देकर कहा कि लोक संगीत हमारी पहचान का अटूट हिस्सा है और डॉ. बड़ाईक जैसे व्यक्तित्व इसे युवा पीढ़ी के लिए सहेजकर रखने का महान कार्य कर रहे हैं. उन्होंने लोक कला को राजकीय और राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रोत्साहन देने की बात कही.

See also  झारखंड में तंबाकू के खिलाफ 26 मई से 26 जून तक चलेगा विशेष जागरूकता अभियान

नागपुरी संगीत को वैश्विक पहचान दिलाने में भूमिका
डॉ. लक्ष्मीकांत नारायण बड़ाईक लंबे समय से नागपुरी संगीत की जड़ों को सींचने में सक्रिय हैं. उन्होंने न केवल अपने गायन बल्कि अपनी मौलिक रचनाओं के माध्यम से भी झारखंड की लोक कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है. वे लगातार विभिन्न मंचों पर प्रस्तुति देकर लोक संगीत की मिठास को लोगों तक पहुंचा रहे हैं. उनकी विशिष्ट गायकी शैली ने न केवल दर्शकों का मन मोहा है, बल्कि कई युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़ने के लिए प्रेरित भी किया है.

सुरों की महफिल में उमड़े संगीत प्रेमी
सम्मान समारोह के दौरान पूरा वातावरण नागपुरी धुनों से सराबोर रहा. इस अवसर पर कई गणमान्य व्यक्ति, प्रख्यात कलाकार और भारी संख्या में संगीत प्रेमी शामिल हुए. डॉ. बड़ाईक ने मंच से अपने कुछ लोकप्रिय नागपुरी गीतों की सुरीली प्रस्तुति भी दी, जिसे श्रोताओं ने भरपूर सराहा और तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका स्वागत किया. इस सम्मान से पूरे नागपुरी संगीत जगत में खुशी की लहर दौड़ गई है और इसे राज्य की गौरवशाली विरासत के लिए एक सुखद क्षण माना जा रहा है.

See also  मधुबनी के बलिराजगढ़ में बड़ी खोज, खुदाई में मिले प्राचीन अवशेष और संरचनाएं

 

Author:

Facebook
Twitter
LinkedIn

Related Posts

[the_ad id='4119']
Verified by MonsterInsights