रांची
राज्य में भूगर्भ जल स्तर को बढ़ाने और वर्षा का जल संरक्षित करने के लिए पेयजल स्वच्छता विभाग और नगर निकायों की तरफ से अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए करीब 2500 ऐसे जलस्रोतों की पहचान की गई है जिनमें कम जल रहता है या सूखे पड़े हैं।
इनकी जलभंडारण क्षमता को बढ़ाकर वर्षा का जल इनमें जमा किया जाएगा। इसके अलावा खराब पड़े हैंडपंप, डीप बोरिंग और खदानों के जरिए भी जल संग्रहण किया जाएगा। केंद्रीय भूजल परियोजना के विज्ञानी सलाहकार परमिंदर सिंह ने बताया कि इस तरह के उपायों से करीब तीन लाख मिलियन लीटर जल जमीन के नीचे भेजा जाएगा।
यह जल पहले से बने वाटर रिचार्ज सिस्टम के अतिरिक्त होगा। भूजल की स्थिति को इससे नया रिचार्ज सिस्टम मिलेगा और यह लंबे समय तक प्रभावी रहेगा। परमिंदर सिंह ने बताया कि नदियों और तालाबों का पानी एक दूसरे को रिचार्ज करेगा तो सतह पर मौजूद जलस्रोतों में सालों भर जल की उपलब्धता रहेगी।
बड़े बांध की जगह नए कच्चे निर्माण से रोकेंगे जल
राज्य में 28 के करीब बड़े बांध हैं जिनमें साल भर जल रहता है। पिछले तीस सालों में किसी बड़े बांध का निर्माण नहीं हुआ है। लेकिन दस हजार के करीब कच्ची संरचना बनी है।
पिछले साल हुई भारी बारिश ने ग्रामीण और वन क्षेत्र में सतह के उपर और नीचे मौजूद जल को स्थिर किया है। लेकिन शहरी क्षेत्र में जल की समस्या गर्मी के साथ ही चरम पर है। इसे रोकने के लिए शहरों के आसपास भी कच्चे निर्माण कर उनमें जल संरक्षण किया जाएगा।
बढ़ा है राज्य का जलभंडार
राज्य में इस वर्ष भी बारिश समय से पहले हुई है। पिछले साल वर्षा जल रिचार्ज और जल दोहन का अनुपात सही रहा था। नई वर्षा ने जल भंडारण को बढ़ाया है जबकि अभी मानसून आने ही वाला है। इससे राज्य को सुरक्षित जल भंडारण में मदद मिलेगी।





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