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India GDP: 7.8% ग्रोथ ने चौंकाया, लेकिन आगे राह आसान नहीं; PM के सलाहकार ने गिनाईं 3 बड़ी चुनौतियां

नई दिल्ली

भारत की GDP ग्रोथ पहली तिमाही में 7.8% रही है, जो उम्मीद से बेहतर है. लेकिन इस रफ्तार को आगे भी बनाए रखना आसान नहीं होगा. प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल वैश्विक अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों और अल नीनो को आगामी दिनों में भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने तीन सबसे बड़ी चुनौतियों के रूप में देख रहे हैं। 

 एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में संजीव सान्याल ने कहा कि 7.8% की ग्रोथ किसी एक सेक्टर के दम पर नहीं आई है. मैन्युफैक्चरिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और कंस्ट्रक्शन समेत अर्थव्यवस्था के कई आयामों ने इसमें योगदान दिया है. उनके मुताबिक, पब्लिक और गवर्नमेंट इंवेस्टमेंट मजबूत बना हुआ है, जबकि प्राइवेट कंपनियां भी निवेश कर रही हैं। 

7% की ग्रोथ भी संतोषजनक

सान्याल ने 7.8% की ग्रोथ को उम्मीद से ज्यादा मजबूत बताया. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा वैश्विक माहौल में इतनी तेज ग्रोथ को लगातार बनाए रखना मुश्किल हो सकता है. उन्होंने कहा कि अगर आने वाली तिमाहियों में भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ 7% के आसपास भी बनी रहती है, तो वह इससे काफी संतुष्ट होंगे. उनके मुताबिक, मौजूदा ग्रोथ का आधार व्यापक है और यह सिर्फ किसी एक सेक्टर पर निर्भर नहीं है। 

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वैश्विक अनिश्चितता बनी बड़ी चुनौती
संजीव सान्याल ने ईरान में युद्ध, ग्लोबल ट्रेड में आई बाधाओं और टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितता को भारत के लिए अहम जोखिम बताया. उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया भारत के लिए महत्वपूर्ण एक्सपोर्ट मार्केट है. इसके अलावा इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं, जिनकी ओर से भेजी जाने वाली रेमिटेंस भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है. लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण यह पूरा क्षेत्र संवेदनशील बना हुआ है। 

तेल की कीमतें भी निभाएंगी भूमिका
कच्चे तेल की कीमतें भी भारत के लिए बड़ी चुनौती ब
नी हुई हैं, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है. संजीव सान्याल के मुताबिक, भारत ने रूस, अमेरिका और वेनेजुएला समेत अलग-अलग देशों से आयात कर अपने सप्लाई सोर्स को डायवर्सिफाई किया है. उन्होंने माना कि विश्व में बनी विपरीत परिस्थितियों के कारण भारत को कुछ बाहरी दबावों का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि, उनका कहना है कि इन चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था फिलहाल अच्छी स्थिति में है। 

अल नीनो और मॉनसून का भी असर
सान्याल ने अल नीनो को भी जोखिम के तौर पर गिनाया. उनके मुताबिक, इसका कुछ असर कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता है. हालांकि, उन्होंने कहा कि फिलहाल इसके प्रभाव की तुलना यूरोप के कुछ हिस्सों में देखे गए गंभीर सूखे से नहीं की जा सकती। 

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मॉनसून अभी जारी है, इसलिए इसका अर्थव्यवस्था और ग्रोथ पर कुल कितना असर पड़ेगा, इस पर अभी निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। 

बेरोजगारी और महंगाई पर क्या बोले?
पीएम मोदी और केंद्र सरकार ने पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़ों को वैश्विक अनिश्चितता के बीच देश की बड़ी उपलब्धि बताया. वहीं विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस ने बेरोजगारी, महंगाई और आर्थिक असमानता का मुद्दा उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश की. इन चिंताओं पर संजीव सान्याल ने कहा कि उपलब्ध हार्ड डेटा घर-परिवारों पर व्यापक दबाव की तस्वीर नहीं दिखाता. उनके मुताबिक, सरकारी लेबर सर्वे के आंकड़े गांव और शहर दोनों में बेरोजगारी दर में धीरे-धीरे कमी की ओर इशारा करते हैं. हालांकि, उन्होंने पढ़े-लिखे युवाओं में बेरोजगारी को एक चिंता माना। 

महंगाई को लेकर उन्होंने कहा कि मौजूदा 4-5% के स्तर को भारत के पुराने आंकड़ों के संदर्भ में देखना चाहिए. करीब एक दशक पहले देश में महंगाई अक्सर 8-12% के दायरे में रहती थी. संजीव सान्याल ने मजबूत उपभोक्ता मांग के संकेत के तौर पर गाड़ियों की रिकॉर्ड बिक्री और एयर कंडीशनर जैसे कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की खरीद का भी जिक्र किया. उनके मुताबिक, ये आंकड़े बताते हैं कि घरेलू खपत में अभी मजबूती बनी हुई है। 

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नई GDP मेथडोलॉजी का किया बचाव
सान्याल ने GDP की नई मेथडोलॉजी और बेस ईयर में बदलाव का भी बचाव किया. उनका कहना था कि कोविड का दौर सामान्य आर्थिक गतिविधियों को प्रतिबिंबित नहीं करता था, इसलिए उस समय बेस ईयर को अपडेट करना मुश्किल था. उनके मुताबिक, 2024 में अर्थव्यवस्था ज्यादा सामान्य स्थिति में लौटने के बाद बेस ईयर को अपडेट किया गया. उन्होंने कहा कि मजबूत GDP आंकड़ों की झलक कॉरपोरेट मुनाफे और कार बिक्री जैसे दूसरे आर्थिक आंकड़ों में भी दिखाई देती है। 

संजीव सान्याल ने माना कि आने वाली तिमाहियों में GDP ग्रोथ की रफ्तार कुछ कम हो सकती है. ऐसे में ग्लोबल ट्रेड, तेल की कीमतों और मॉनसून से जुड़े जोखिमों पर नजर रखना जरूरी होगा. हालांकि, मौजूदा तस्वीर में भारतीय अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी मजबूती यह है कि ग्रोथ कई सेक्टर से आ रही है. यही व्यापक आधार आने वाले समय में अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों के बीच सहारा दे सकता है। 

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