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इलाज नहीं मिला, मां की गोद में दम तोड़ा:अस्पताल के बाहर मां रोते हुए पुकारती रही… बेटा उठ; परिजन बोले- डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं थे

इलाज नहीं मिला, मां की गोद में दम तोड़ा:अस्पताल के बाहर मां रोते हुए पुकारती रही... बेटा उठ; परिजन बोले- डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं थे

इलाज नहीं मिला, मां की गोद में दम तोड़ा:अस्पताल के बाहर मां रोते हुए पुकारती रही… बेटा उठ; परिजन बोले- डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं थे

इलाज नहीं मिला, मां की गोद में दम तोड़ा:अस्पताल के बाहर मां रोते हुए पुकारती रही... बेटा उठ; परिजन बोले- डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं थे
रोते हुए मां

जबलपुर में एक मां अपने 5 साल के बीमार बेटे को गोद में लेकर अस्पताल के बाहर बैठी रही, लेकिन ओपीडी के समय में भी कोई डॉक्टर नहीं मिला।

जबलपुर में एक मां अपने 5 साल के बीमार बेटे को गोद में लेकर अस्पताल के बाहर बैठी रही, लेकिन ओपीडी के समय में भी कोई डॉक्टर नहीं मिला। मां बार-बार बेटे से उठने का बोलती… बेटा उठ जा… उठ न बेटा… लेकिन इलाज न मिलने से उसकी मौत हो गई। मां उसे सीने से लगाए रोती रही। इस घटना का वीडियो सामने आया है, जिसमें अस्पताल के बाहर महिला रोती-बिलखती दिख रही है।

घटना जबलपुर जिले के बरगी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की है। मृत बच्चे के परिजन का कहना है कि बच्चे को उल्टी-दस्त की शिकायत होने पर बुधवार सुबह 10 बजे अस्पताल ले जाया गया। यहां डॉक्टर नहीं मिले। परिजनों ने बच्चे की मौत के लिए अस्पताल प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है।

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मामले में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी ने बताया कि उन्होंने कलेक्टर से फोन पर बात कर जांच के निर्देश दिए हैं और रिपोर्ट मांगी है। दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।

परिजन का दावा- दो घंटे डॉक्टरों का इंतजार करते रहे
बरगी से करीब 15 किलोमीटर दूर तिन्हेटा गांव के ऋषि को बुधवार सुबह उल्टी-दस्त की शिकायत हुई। बच्चे को उसके मामा पवन कुमार और परिजन सुबह करीब 10 बजे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बरगी ले गए। परिजन का आरोप है कि अस्पताल में बच्चे की मेडिकल जांच के लिए एक भी डॉक्टर नहीं था। एक नर्स ड्यूटी पर थी।

ऋषि की हालत बिगड़ती चली गई और उसकी अस्पताल में ही मौत हो गई। पवन कुमार का कहना है कि नर्स ने बताया सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक डॉक्टर की ड्यूटी रहती है, लेकिन हम 12 बजे तक अस्पताल में इलाज के लिए भटकते रहे।

अस्पताल परिसर में मां बेटे को सीने से लगाए रोती रही। यह दृश्य जिसने भी देखा, उसका कलेजा भर आया।

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अब सीएमएचओ कार्यालय और कलेक्टर के जवाब जान लीजिए…

धार्मिक कार्यक्रम में व्यस्त थे डॉक्टर
सीएमएचओ जबलपुर दफ्तर से मिली जानकारी के अनुसार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बरगी में डॉ. लोकेश की ड्यूटी थी। वह बुधवार को अस्पताल में दोपहर 12 बजे पहुंचे। जबकि अस्पताल की ओपीडी सुबह 9 बजे शुरू होकर शाम 4 बजे खत्म होती है। सूत्रों के मुताबिक डॉ. लोकेश ने अपने सीनियर्स को बताया कि परिवार में एक धार्मिक कार्यक्रम के कारण वे ड्यूटी पर देरी से पहुंचे थे।

मां अपने बच्चे को अस्पताल के बाहर गोद में लेकर बैठी रही। वह बार-बार उसे उठने का बोल रही थी, लेकिन बच्चे की मौत हो चुकी थी।

कलेक्टर बोले- बच्चे की पहले ही मौत हो चुकी थी
जबलपुर कलेक्टर इलैयाराजा टी का कहना है कि बच्चे की अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो चुकी थी। बच्चे को कोई भी गंभीर बीमारी नहीं थी। उसका एक पैर जल गया था, जिसका इलाज परिजन पिछले 10 दिन से स्थानीय स्तर पर करा रहे थे।

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जले हुए पैर में इन्फेक्शन बढ़ गया था, जिसके इलाज के लिए उसे लेकर परिजन अस्पताल पहुंचे थे। डॉ. लोकेश ने बच्चे को देखने के बाद मृत घोषित किया था। परिजन को भी बता दिया था कि बच्चे की मौत अस्पताल आने से पहले हो चुकी है।

मृतक ऋषि के मामा पवन कुमार ने बताया कि वह बुधवार सुबह करीब 10 बजे बच्चे को लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बरगी पहुंचे थे। यहां एक भी डॉक्टर मौजूद नहीं था।

पूर्व सीएम कमलनाथ ने किया ट्वीट
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस घटना की तस्वीर के साथ ट्वीट किया- मध्यप्रदेश के जबलपुर के बरगी की यह तस्वीरें बेहद हृदय विदारक है। एक मासूम बालक स्वास्थ्य केन्द्र के बाहर अपनी मां की गोद में तड़प-तड़पकर दम तोड़ देता है क्योंकि ना उसे डॉक्टर मिल पाया , ना इलाज मिल पाया।



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