
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को बेंगलुरु में दक्षिण क्षेत्र के आईसीएमआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) की आधारशिला रखी।
आधारशिला का अनावरण करते हुए, राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि यह जानकर अच्छा लगा कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी को विश्व स्वास्थ्य संगठन की सहयोगी प्रयोगशालाओं में से एक के रूप में नामित किया गया है।
उन्होंने कहा, “मुझे यह जानकर खुशी हुई कि भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने प्रभावी कोविड प्रबंधन के लिए अनुकरणीय समर्थन प्रदान किया है और अपने अनुसंधान बुनियादी ढांचे का विस्तार कर रहा है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी), पुणे भी वायरोलॉजी के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ाने के लिए हर संभव कदम उठा रहा है।”
राष्ट्रपति ने कहा, विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में मांगों को पूरा करने के लिए देश भर में क्षेत्रीय परिसरों के माध्यम से राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान का विस्तार प्रशंसनीय है।
उन्होंने देश के मानव इतिहास में देश में निर्मित टीकों के साथ सबसे बड़े टीकाकरण अभियान की भी सराहना की।
उन्होंने कहा, “महामारी से निपटने में, हमारी उपलब्धियां कई विकसित देशों की तुलना में बेहतर रही हैं। इस उपलब्धि के लिए, हम अपने वैज्ञानिकों, डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिक्स और टीकाकरण से जुड़े कर्मचारियों के आभारी हैं।”
इस मौके पर स्वास्थ्य राज्य मंत्री डॉ भारती प्रवीण पवार भी मौजूद थीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रौद्योगिकी का लाभ उठाया है ताकि किसी भी प्रकोप की शुरूआती चरण में जांच की जा सके और इसे रोकने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा सके। यह नया एनआईवी स्वास्थ्य रक्षा प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में एक कदम और आगे है।
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