
इस मामले के जानकारों का कहना है कि अधिकतर नाटो देशों का यूक्रेन को मदद देने से अपने हाथ खींचना रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बड़ी जीत के रूप में देखी जा सकती है। इस बात में कोई संदेह नहीं कि रूस दुनिया की महाशक्ति है और परमाणु हथियारों से लेकर कई घातक हथियारों का जखीरा रखे हुए है। पिछले एक साल में हालांकि रूस का हथियार भंडार भी प्रभावित हुआ है लेकिन, खत्म नहीं हुआ। हाल ही में रूसी सैनिकों ने यूक्रेन की राजधानी कीव समेत कई शहरों पर ईरानी ड्रोन से तबाही मचाई थी। अब रूसी सैनिक खेरसॉन शहर में यूक्रेनी सैनिकों को खदेड़ने में जुटे हैं।
कंगाल हो रहे नाटो देश
रिपोर्ट है कि कई यूरोपीय देश यूक्रेन को मदद करके खुद कंगाल हो गए हैं। कई नाटो देश इस वक्त हथियारों की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में अब उन्हें खुद की सुरक्षा का खतरा सता रहा है। पिछले कुछ महीनों में संयुक्त राज्य अमेरिका और कई नाटो देशों ने रूस के खिलाफ लड़ाई में यूक्रेन को अरबों डॉलर के हथियार और उपकरण सप्लाई किए हैं। लेकिन अब कई छोटे नाटो देशों और यहां तक कि कुछ बड़े देशों के पास हथियारों का जखीरा खत्म होने लगा है।
हथियार तुरंत तैयार करना लगभग असंभव
रिपोर्ट कहती है कि हथियारों का तुरंत निर्माण कई नाटो देशों के लिए मुश्किल है। दुनिया इस वक्त आर्थिक मंदी झेल रही है। ऐसे में कई छोटे नाटो देशों के पास तुरंत घातक हथियार आयात करना या तैयार करना लगभग असंभव है। कई बड़े देश भी इससे अछूते नहीं है। इसके पीछे बड़ी वजह मजबूत रक्षा क्षेत्र का न होना भी है।





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