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जाने कृष्ण के विवाह से शुरू हुई थी लाल रंग,सिंदूर व मंगलसूत्र की प्रथा, बेहद पुण्यदायिनी है यह कथा मनु मिश्रा श्रम वीर भारत ज्योतिष राशिफल समाचार 16 अगस्त 2022

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 जाने कृष्ण के विवाह से शुरू हुई थी लाल रंग,सिंदूर व मंगलसूत्र की प्रथा, बेहद पुण्यदायिनी है यह कथा

मनु मिश्रा  श्रम वीर भारत ज्योतिष राशिफल समाचार 16 अगस्त 2022


शादी के दौरान लाल रंग की चीजों का प्रयोग अधिक किया जाता है। हिंदू धर्म में लाल रंग को बेहद ही शुभ माना गया है और किसी भी विवाह में लाल रंग का प्रयोग करना अनिवार्य माना गया है। हालांकि क्यों विवाह के समय इस रंग का प्रयोग किया जाता है, इसके बारे में काफी कम लोगों को जानकारी है। दरअसल लाल रंग का प्रयोग विवाह के समय करने से एक कथा जुड़ी हुई है। जो कि श्री कृष्ण के विवाह की है।

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कथा के अनुसार भगवान श्री कृष्ण जी रूकमणी से विवाह रचाने के लिए बारात लेकर द्वारका से रवाना हुए थे। लेकिन रास्ते में चूहों ने खूब सारे गड्ढे कर दिए थे। जिसकी वजह से श्री कृष्ण का रथ गड्ढों में फंस रहा था और बारात में आए लोगों को चलने में परेशानी होने लगी। चूहों द्वारा किए जा रहे गड्ढों को देखकर श्री कृष्ण ने आंख बंद कर गणेश जी को याद किया। जिसके बाद गणेश जी प्रकट हो गए। गणेश जी को देखकर श्री कृष्ण जी ने उनसे पूछा कि आखिर ये चूहें क्यों रास्ते में गड्ढे कर रहे हैं। रास्तों में गड्ढे होने के कारण मेरा रथ सही से नहीं चल पा रहा है। श्री कृष्ण के इस सवाल के जवाब में गणेश जी ने उन्हें बताया कि आपने जाने-अनजाने में मेरा और भूमि पुत्र मंगल देव का अपमान कर दिया है। जिसकी वजह से ये सब हो रहा है।

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गणेश जी की ये बात सुनकर श्री कृष्ण हैरान हो गए और उन्होंने पूछा कि आखिर मैंने ऐसा क्या कर दिया। जिसकी वजह से आप और भूमि पुत्र मंगल देव नाराज हो गए हैं। तब गणेश जी ने श्री कृष्ण जी को कहा कि आपने शुभ कार्य से पहले मेरा पूजा नहीं किया और ना ही मुझे विवाह का प्रथम निमंत्रण दिया। इसके अलावा जब आप बारात लेकर निकले तो आपने भूमि पूजन भी नहीं किया। जिसके कारण भूमि के पुत्र मंगल देव भी आपसे नाराज हो गए। श्री कृष्ण ने गणेश जी से माफी मांगी और उन्हें अपने विवाह के लिए निमंत्रित किया। श्री कृष्ण के माफी मांगने से गणेश जी ने उन्हें माफ कर दिया। जिसके बाद चूहों ने रास्ते पर गड्ढे करना बंद कर दिए। श्री गणेश ने श्री कृष्ण जी से कहा, मैं प्रसन्न हूं, अब आप मंगल देव को मना लें। मंगल देव को प्रसन्न करने के लिए श्री कृष्ण जी ने रास्ते पर भूमि पूजन किया और नारियल को फोड़ा। लेकिन मंगल देव प्रसन्न नहीं हुए। तब गणेश जी ने श्री कृष्ण को सुझावा देते हुए कहा कि आप मंगल देव को प्रसन्न करने के लिए लाल वस्तुओं का प्रयोग विवाह में करें। क्योंकि मंगल देव को लाल रंग प्रिय है और इसका इस्तेमाल करने से वो प्रसन्न हो जाएंगे।

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भगवान गणेश जी की बात को मानते हुए श्री कृष्ण ने मांगलिक वस्तुओं का चलन प्रारंभ किया और विवाह में लाल वस्तुओं को शामिल किया। श्री कृष्ण के कहने पर रूकमणी ने अपनी पोशाक में भी लाल रंग को जोड़ लिया। हालांकि तब भी मंगल देव प्रसन्न नहीं हुए। जिसके बाद श्री कृष्ण ने एक बार फिर गणेश जी का स्मरण किया और पूछा अब मैं क्या करूं? गणेश जी के कहने पर भगवान श्री कृष्ण ने लाल रंग के सिंदूर का इस्तेमाल किया और इस रंग से रूकमणी की मांग भर दी। लेकिन फिर भी मंगल देव की नाराजगी दूर नहीं हुई। लेकिन श्री कृष्ण ने हार नहीं मानी और वो इन्हें विवाह के दौरान प्रसन्न करने में लगे रहे।

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श्री कृष्ण ने एक और प्रयास करते हुए लाल रंग के धागे को रूकमणी के गले में पहनाया। जिसे आज हम मंगलसूत्र कहते हैं। ऐसा करने के बाद मंगल देव प्रसन्न हो गए। मंगल देव के प्रसन्न होने के बाद श्री कृष्ण ने गणेश दी से कहा कि एक भूमि पूजन नहीं करने के कारण मंगल देव इतने रूष्ट हो गए? इस पर श्री गणेश ने कहा कि जब आपने भूमि पूजन किया था। तभी मंगल देव प्रसन्न हो गए थे। शेष सभी रस्में मैंने आपसे करवाई हैं और इन रस्मों को आने वाले समय में करने से हर विवाह अच्छे से संपन्न हो जाएगा। इस तरह से विवाह में मांगलिक वस्तुओं का चलन शुरू हो गया।


आज भी इन रस्मों का पालन किया जाता है। शादी का प्रथम न्योता गणेश जी को भेजा जाता है। जबकि बारात निकालते हुए भूमि पूजन किया जाता है। इसके अलावा शादी में लाल रंग के वस्त्र, सिंदूर और मंगलसूत्र का प्रयोग किया जाता है।

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