ग्वारीघाट स्थित हॉस्टल से बिना बताये निकले चारों बच्चे सकुशल पहुंचे अपने घर शहपुरा
पूछताछ पर हास्टल में अच्छा न लगना एवं मम्मी पापा की याद आना कारण बताया
थाना प्रभारी ग्वारीघाट श्रीमति भूमेश्वरी चौहान ने बताया कि आज दिनॉक 23-11-22 को सुबह 4-30 बजे विजय किशोर चौहान उम्र 54 वर्ष निवासी पुरानी बस्ती साईधाम रोड ग्वारीघाट ने सूचना दी कि वह शिक्षक है। आज सुबह लगभग 4 बजे ग्वारीघाट साईधाम के पास स्थित वर्षा हास्टल के गेट का ताला खोला और टहलने के लिये चला गया था, कुछ देर बाद लौटकर आया एवं चैक किया तो हॉस्टल मे रहने वाले 1-रूद्रकुमार पटेल पिता राजकुमार पटेल पिता राजकुमार पटेल उम्र 11 वर्ष, 2-शुभ सिंह पिता केशव सिंह राजपूत उम्र 7 वर्ष, 3-जय सिंह पिता केशव सिंह राजपूत उम्र 11 वर्ष, 4-विराज सिंह पिता दुर्गेश सिंह उम्र 11 वर्ष के नहीं थे। वह अपने चार पहिया वाहन से बच्चों केा ढूंढता हुआ बच्चो के घर शहपुरा स्थित बिलपठार व ग्राम डोभी पहुंचा किंतु वहॉ बच्चे नहीं मिले। कोई अज्ञात हास्ॅटल में रहने वाले बालकों को बहला फुसलाकर ले गया है। रिपोर्ट पर धारा 363 भादवि का अपराध ंपजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। घटित हुई घटना से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया।
*घटित हुई घटना को गम्भीरता से लेते हुये पुलिस अधीक्षक जबलपुर श्री सिद्धार्थ बहुगुणा (भा.पु.से.) द्वारा बालकों की पतासाजी के सम्बंध में आवश्यक दिशा निर्देश देते हुये जिले में पदस्थ समस्त राजपत्रित अधिकारियों एवं थाना प्रभारियों केा बालकों की सरगर्मी से तलाश कर दस्तयाबी हेतु आदेशित किये जाने पर अति. पुलिस अधीक्षक शहर (दक्षिण) श्री संजय कुमार अग्रवाल एवं नगर पुलिस अधीक्षक कैंट श्री शशांक (भा.पु.से.) के मार्ग निर्देशन में थाना ग्वारीघाट की टीम को तलाश पतासाजी हेतु लगाया गया।*
सी.सी.टीव्ही. फुटेज खंगाले गये तथा जबलपुर पुलिस के वाट्सअप ग्रुपों में भी चारों बालकों का फोटो डालते हुये वायरलैस सैट के माध्यम से शहर एवं देहात के थानों कों रेल्वे स्टेशन, बस स्टैण्ड, तथा थाना क्षेत्र में तलाश पतासाजी करवाने हेतु बताते हुये सरहदी जिलों के साथ ही जी.आर.पी. एवं आर.पी.एफ. को भी बालकों की फोटो वाट्सअप के माध्यम से भेजी जाकर ट्रेन एवं रेल्वे स्टेशन व बस स्टैण्ड में तलाश पतासाजी हेतु बताया गया।
साथ ही शहपुरा थाना प्रभारी को अवगत कराया गया। दौरान तलाश के चारों बच्चे शाम लगभग 5 बजे अपने-अपने घर सकुशल पहुंचें, जिन्होंने पूछताछ पर बताया कि हॉस्टल मे अच्छा नहीं लग रहा था, मम्मी-पापा की याद आ रही थी, चारों ने प्लान बनाया और सुबह 4 बजे गेट खुला पाकर चारों एक साथ निकल गये थे, रास्ता भटक गये थे पूछते-पूछते पैदल भेडाघाट चौराहा पहुंचे जहॉ से बस में बैठकर रेल्वे फाटक शहपुरा में बस से उतरकर पैदल अपने घर चले गये थे।
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