
वाराणसी
12 ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख बाबा विश्वनाथ धाम में रिकॉर्ड चढ़ावा आया है. वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल से 31 मार्च तक) में अभी तक यह चढ़ावा 28.37 करोड़ हो गया है. इस चढ़ावे को लेकर ये बात भी सामने आई है कि बाबा विश्वनाथ के भक्त डिजिटल इंडिया मुहिम में भी बड़ा योगदान दे रहे हैं. कुछ चढ़ावे में से 40 फीसदी ऑनलाइन चढ़ाया गया है.
गौरतलब है कि कोरोना काल से ठीक पहले साल 2018-19 में सर्वाधिक 26.65 करोड़ रुपये चढ़ावा आया था. इसमें अप्रैल और मई में रिकॉर्ड 9.5 करोड़ रुपये चढ़ावा के तौर पर आए थे.
दोगुनी हो गई श्रद्धालुओं की संख्या
अब काशी कॉरिडोर बनने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में तेजी आई है. जिसका सीधा प्रभाव बाबा विश्वनाथ के खजाने पर भी पड़ा है. ये बात भी सामने आई है कि काशी की देव दीपावली और श्रावण मास में श्रद्धालुओं की संख्या बीते वर्षों की तुलना में दोगुनी हो गई है.
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कॉरिडोर के उद्घाटन के बाद से बढ़ी संख्या
13 दिसंबर से जब से काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन हुआ है, तब से न केवल श्रद्धालुओं मंदिर में की संख्या बढ़ी है बल्कि सुविधाएं भी बढ़ा दी गई हैं. उद्घाटन के पहले मिलने वाले दान और बाद में लगभग दोगुना का अंतर पाया गया है. इसके साथ ही मंदिर का खर्चा और जिम्मेदारी भी बढ़ गई हैं.
ऑनलाइन और ऑफलाइन लिया जा रहा दान
श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से न केवल दान बल्कि पूजन की गतिविधियां भी बढ़ी हैं. दान के ऑनलाइन और ऑफलाइन प्लेटफार्म बनाकर दान लिया जा रहा है.
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ऑनलाइन टिकट और पूजा की व्यवस्था
श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन टिकट और पूजा की व्यवस्था भी की गई है. मंदिर में न केवल हुंडी दान बढ़ा है, बल्कि अन्य माध्यमों से भी दान में बढोत्तरी हुई है.
पर्यटन उद्योग में आया उछाल
अब विकेंड पर भी ज्यादा श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं. काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की वजह से पर्यटन उद्योग में उछाल आया है. इससे न केवल धार्मिक पर्यटन, बल्कि कॉर्पोरेट टूरिज्म में भी इजाफा हुआ है.





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