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‘क्या सच में निकलती है भूतों की बारात?’ सोशल मीडिया पर पूछे गए सवाल पर लोगों ने दिए अनोखे जवाब!

 

भूत, प्रेत, पिशाच निशाचर, अग्नि बेताल काल मारी मर….ये पंक्तियां श्री बजरंग बाण की हैं जो भगवान हनुमान की स्तुति में गाया जाता है. कहते हैं कि भगवान हनुमान भूत-प्रेत को दूर भगा देते हैं लेकिन ये भी मान्यता है कि हनुमान, भगवान शिव के रूप हैं और ये तो सब जानते हैं कि भगवान शिव भूतों के भी देवता हैं.

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इसी वजह से उनकी बारात में भूत, प्रेत, दानव आदि हर कोई शामिल हुआ था. इसी लिए शिव बारात (Shiv Barat) को खास माना जाता है. पर क्या आप जानते हैं कि भारत में खास मान्यता है जिसके तहत भूतों की भी बारात (Bhooton ki Baraat) निकलती है?

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सोशल मीडिया साइट कोरा पर किसी ने भूतों की बारात (Marriage procession of ghosts) से ही जुड़ा सवाल पूछा. कोरा एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जिसपर आम लोग अपने सवाल पूछते हैं और आम लोग ही उनके जवाब देते हैं. इसलिए ये जवाब हमेशा सही नहीं होते, ऐसे में इन जवाबों के सही होने की न्यूज18 हिन्दी पुष्टि नहीं करता है. किसी ने कोरा पर पूछा- ‘क्या सच में भूतों की बारात निकलती है?’ इसके बाद लोगों ने अपने-अपने अनुभवों और विचारों के अनुसार जवाब दिया.

‘क्या सच में निकलती है भूतों की बारात?’ सोशल मीडिया पर पूछे गए सवाल पर लोगों ने दिए अनोखे जवाब!

जब पुलिसकर्मी को दिखी थी बारात!
बबल हिर्देश साहनी नाम के शख्स ने एक लंबी कहानी सुनाते हुए बताया कि शिव की बारात में भूत गए थे जिसे भूतों की बारात भी कहा जाता था. वहीं रश्मी भारद्वाज ने 2 साल पहले उत्तर दिया था- “ये बात मेरी दादी बताती थीं जब हम लोग छोटे थे. उनके भाई पुलिस में इंस्पेक्टर थे और कभी-कभी दौरे के लिए एक जगह से दूसरी जगह रात में जाया करते थे. वो राजस्थान में पोस्टेड थे और एक बार जंगल से निकल रहे थे तो रास्ते में उन्होंने देखा कि बहुत सारे ढोल मंजीरे बज रहे हैं और कीर्तन हो रहा है. वहां कई लोग मौजूद थे जिन्होंने उन्हें वहां रोका और प्रसाद दिया लेकिन उनका पहले भी कई बार भूतों से सामना हो चुका था तो उन्होंने प्रसाद खाया नहीं मगर ले लिया. वो वहां से चल पड़े मगर आगे जाकर जो प्रसाद उन्हें मिला था, वो कोयला बन गया और थोड़ी दूर जाने पर वहां कोई मौजूद नहीं था.”

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ढोल नगाड़ों की आवाज के पीछे ये वजह हो सकती है संभव
3 साल पहले एथेना शर्मा नाम के यूजर ने जवाब दिया- “मैंने तो नहीं देखी, हां, एक बार उत्तराखंड के एक पहाड़ी गांव गया था, जहां जंगल की तरह से रोज रात को वाद्य यंत्रों की आवाजें और ढोल नगाड़ों की आवाजें सुनाई देती थीं. स्थानीय निवासी बताते थे, की यह भूतों की बारात निकलने की आवाज है. मेरा प्रश्न सदैव यही होता था, रोज कौन बारात निकालता है? शायद उन जंगलों में प्राकृतिक हवा जब पेड़-पौधों, और गुफाओं आदि से निकलती होगी तब ऐसी आवाजें पैदा हो जाती होंगी.”

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