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सर कट गया तब भी इतने साल तक जिंदा रहा मुर्गा… इसकी कहानी पढ़ आप भी सोच में पड़ जाएंगे!
Chicken Without Head: रिपोर्ट्स के हिसाब से माइक की चोंच, चेहरा और आंखें निकल गई थीं, लेकिन स्मल्डर्स का अनुमान था कि माइक के मस्तिष्क का 80 फीसदी हिस्सा बचा रह गया था?

Headless Chicken: अगर हम आपसे पूछें कि क्या सिर कटने के बाद कोई इंसान या जीव-जंतु जिंदा रह सकता है? आपका जवाब होगा ‘बिल्कुल नहीं’, लेकिन यकीन करेंगे अगर हम आपसे कहें कि एक मुर्गे ने ऐसा कर दिखाया था और पूरे 18 महीने तक जिंदा भी रहा था! आज से लगभग 72 साल पहले अमेरिका में एक ऐसी ही अजीबोगरीब घटना हुई थी. उस समय बिना सिर के किसी मुर्गे को देखकर लोग चौंक जाते थे. आइए जानते हैं इस हैरतंगेज कारनामें की कहानी…
कैसे कटा मुर्गे का सिर?
दरअसल, 10 सितंबर 1945 को कोलाराडो के फ्रूटा में रहने वाले किसान लॉयड ओल्सेन और उनकी पत्नी क्लारा अपने फार्म पर मुर्गे-मुर्गियों को काट रहे थे. इस दौरान लॉयड ने साढ़े पांच महीने के एक माइक नाम वाले मुर्गे का भी सिर काटा, लेकिन उन्हें हैरानी तब हुई जब माइक मरा नहीं बल्कि बिना सिर के भी दौड़े जा रहा था. उन्होंने उस सिर कटे मुर्गे को एक बक्से में बंद कर दिया, लेकिन अगली सुबह उठकर देखा तो वह तब भी जिंदा ही था.
वैज्ञानिकों ने किए कई प्रयोग
सिरकटे मुर्गे के जिंदा रहने की खबर धीरे-धीरे पूरे फ्रूटा सहित अमेरिका के कई शहरों में फैल गई. कहा जाता है कि साल्ट लेक सिटी में स्थित यूटा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने यह जानने के लिए कि मुर्गा बिना सिर के भी जिंदा रह सकता है, कई मुर्गों के सिर काटे लेकिन माइक जैसी खूबी उन्हें किसी भी मुर्गे में नहीं मिल सकी. इस सिरकटे मुर्गे को ‘मिरेकल माइक’ नाम दिया गया था.
कैसे होता था माइक का खाना पीना?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सिरकटे माइक को ड्रॉप से जूस वगैरह दिया जाता था और उसकी भोजन नली को सीरिंज से साफ किया जाता था, ताकि उसका दम न घुट सके.
कैसे हुई मौत?
मार्च, 1947 में माइक की मौत हो गई थी. इसकी मौत की वजह बताई जाती है कि लॉयड ओल्सेन ने उसे जूस देने के बाद उसकी भोजन नली को सीरिंज से साफ नहीं किया था, क्योंकि वो सीरिंज को कहीं रखकर भूल गए थे. जिस वजह से माइक का दम घुट गया और उसकी मौत हो गई थी.
मुर्गे ने कराई लाखों की कमाई
कहते हैं कि ‘मिरेकल माइक’ की ख्याति इतनी बड़ी कि लॉयड ओल्सेन ने उसे देखने के लिए भी टिकट लगा दिया था. उस जमाने में वह माइक को देखने आने वाले दर्शकों से 4500 डॉलर हर महीने कमाते थे. आज के हिसाब से ये 4500 डॉलर करीब तीन लाख 20 हजार रुपये के बराबर हैं.
कैसे जिंदा रहा माइक?
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, न्यूकैसल यूनिवर्सिटी में सेंटर फॉर बिहैवियर एंड इवोल्यूशन से जुड़े चिकन एक्सपर्ट डॉ. टॉम स्मल्डर्स ने बताया कि मुर्गे का पूरा सिर उसकी आंखों के कंकाल के पीछे एक छोटे से हिस्से में स्थित होता है. रिपोर्ट्स के हिसाब से माइक की चोंच, चेहरा और आंखें निकल गई थीं, लेकिन स्मल्डर्स का अनुमान था कि माइक के मस्तिष्क का 80 फीसदी हिस्सा बचा रह गया था, जिससे माइक का शरीर, धड़कन, सांस, भूख और पाचन तंत्र काम कर रहा था. आज फ्रूटा में हर साल हेडलेस चिकन नाम का त्योहार भी मनाया जाता है, इसकी शुरुआत साल 1999 से हुई थी.





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