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अपनों को भी कनाडा में नौकरी दिला पाएंगे भारतीय:इमिग्रेशन पॉलिसी में बदलाव से 2 लाख विदेशियों को होगा फायदा

कनाडा ने अपनी इमिग्रेशन पॉलिसी में बड़ा बदलाव किया है। जिसका वहां काम करने वाले भारतीयों को फायदा होगा। कनाडा की सरकार ने तय किया है कि वहां काम करने वाले दूसरे देश के लोगों के परिवार वालों को भी वर्क परमिट दिया जाएगा। जिससे कनाडा में काम कर रहे लोग अपने परिजनों को भी वहां नौकरी दिला पाएंगे। ये परमिट केवल अस्थायी कामगारों के लिए ही होगा। जिसके अगले साल से लागू होने की उम्मीद है। OYO में दूसरी बार छंटनी:3,700 में से 600 एम्प्लॉइज को निकालेगी ओयो, 250 नए लोगों को हायर भी करेगी कंपनी कनाडा के इमिग्रेशन और रिफ्यूजी मंत्री शौन फ्रेजर ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। बताया गया कि बाहर से आने वाले कामगारों की हेल्थ, आर्थिक हालत को सुधारने के लिए यह फैसला किया है। यह पॉलिसी लागू होने के बाद कनाडा में रह रहे विदेशी कामगार अपने परिवार के लोगों के साथ रह सकेंगे, जिससे वो अपने काम पर ज्यादा ध्यान दे पाएंगे। पति-पत्नी के बीच तनाव को कम करते हैं अशोक की पत्तियों के ये अचूक उपाय दो लाख विदेशियों को होगा फायदा इस पॉलिसी से पहले केवल हाई स्किल्ड वर्कर्स के परिवार वालों को कनाडा में नौकरी करने की अनुमति थी। जबकि दो साल के लिए लागू की जा रही नई पॉलिसी के बाद यह बदल जाएगा। वहां काम करने वाला कोई भी अस्थाई व्यक्ति अपने परिवार वालों को वहां वर्क परमिट दिला सकेगा। एक अनुमान के मुताबिक इस नई पॉलिसी से लगभग दो लाख विदेशी वर्कर्स को फायदा होने की उम्मीद है।  वरमाला पहनाते ही दुल्हन की मौत:दिन में भी ब्लड प्रेशर लो हुआ था; रात में स्टेज पर चक्कर खाकर गिरी पहले की थी 14 लाख से ज्यादा प्रवासियों को नौकरी देने की घोषणा कनाडा के इमिग्रेशन मिनिस्टर शौन फ्रेजर ने पहले भी देश में लेबर फोर्स की कमी के चलते प्रवासियों को काम करने का मौका देने की बात कही थी। अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए कनाडा को और लोगों की जरूरत है। इस जरूरत को पूरा करने के लिए कनाडा ने इमिग्रेशन लेवेल्स प्लान 2023-25 के तहत अगले तीन साल में 14.5 लाख अप्रवासी लोगों को देश में नौकरी देने का प्लान बनाया है। महामारी के बाद काम छोड़ रहे लोग जून-जुलाई 2022 में कनाडा ने कोविड-19 महामारी की 7वीं लहर का सामना किया। इस दौरान 11.2% हॉस्पिटल स्टाफ और नर्स भी संक्रमण की चपेट में आकर बीमार हो गए। इससे काम करने वालों की कमी हुई और कई हॉस्पिटल के इमरजेंसी वार्ड को बंद करने की नौबत आ गई थी।

कनाडा ने अपनी इमिग्रेशन पॉलिसी में बड़ा बदलाव किया है। जिसका वहां काम करने वाले भारतीयों को फायदा होगा। कनाडा की सरकार ने तय किया है कि वहां काम करने वाले दूसरे देश के लोगों के परिवार वालों को भी वर्क परमिट दिया जाएगा। जिससे कनाडा में काम कर रहे लोग अपने परिजनों को भी वहां नौकरी दिला पाएंगे। ये परमिट केवल अस्थायी कामगारों के लिए ही होगा। जिसके अगले साल से लागू होने की उम्मीद है।

OYO में दूसरी बार छंटनी:3,700 में से 600 एम्प्लॉइज को निकालेगी ओयो, 250 नए लोगों को हायर भी करेगी कंपनी

कनाडा के इमिग्रेशन और रिफ्यूजी मंत्री शौन फ्रेजर ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। बताया गया कि बाहर से आने वाले कामगारों की हेल्थ, आर्थिक हालत को सुधारने के लिए यह फैसला किया है। यह पॉलिसी लागू होने के बाद कनाडा में रह रहे विदेशी कामगार अपने परिवार के लोगों के साथ रह सकेंगे, जिससे वो अपने काम पर ज्यादा ध्यान दे पाएंगे।

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पति-पत्नी के बीच तनाव को कम करते हैं अशोक की पत्तियों के ये अचूक उपाय

दो लाख विदेशियों को होगा फायदा

इस पॉलिसी से पहले केवल हाई स्किल्ड वर्कर्स के परिवार वालों को कनाडा में नौकरी करने की अनुमति थी। जबकि दो साल के लिए लागू की जा रही नई पॉलिसी के बाद यह बदल जाएगा। वहां काम करने वाला कोई भी अस्थाई व्यक्ति अपने परिवार वालों को वहां वर्क परमिट दिला सकेगा। एक अनुमान के मुताबिक इस नई पॉलिसी से लगभग दो लाख विदेशी वर्कर्स को फायदा होने की उम्मीद है।

 वरमाला पहनाते ही दुल्हन की मौत:दिन में भी ब्लड प्रेशर लो हुआ था; रात में स्टेज पर चक्कर खाकर गिरी

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पहले की थी 14 लाख से ज्यादा प्रवासियों को नौकरी देने की घोषणा

कनाडा के इमिग्रेशन मिनिस्टर शौन फ्रेजर ने पहले भी देश में लेबर फोर्स की कमी के चलते प्रवासियों को काम करने का मौका देने की बात कही थी। अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए कनाडा को और लोगों की जरूरत है। इस जरूरत को पूरा करने के लिए कनाडा ने इमिग्रेशन लेवेल्स प्लान 2023-25 के तहत अगले तीन साल में 14.5 लाख अप्रवासी लोगों को देश में नौकरी देने का प्लान बनाया है।

महामारी के बाद काम छोड़ रहे लोग

जून-जुलाई 2022 में कनाडा ने कोविड-19 महामारी की 7वीं लहर का सामना किया। इस दौरान 11.2% हॉस्पिटल स्टाफ और नर्स भी संक्रमण की चपेट में आकर बीमार हो गए। इससे काम करने वालों की कमी हुई और कई हॉस्पिटल के इमरजेंसी वार्ड को बंद करने की नौबत आ गई थी।

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