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#संयुक्त राष्ट्र महासभा में बज रहा भारत का डंका कई देशों ने की PM मोदी की नीतियों की सराहना#

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 77वें सत्र में भारत का डंका बज रहा है। भारत की आर्थिक और विदेश नीति के लिए दुनिया के कई विकासशील और विकसित देशों ने सराहना की है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों सहित अन्य नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की नीतियों के लिए सराहना की है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि भारत सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके अलावा फ्रांस, जमैका और पुर्तगाल जैसे देशों ने भी भारत की जमकर तारीफ की है।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए पीएम मोदी की टिप्पणी का जिक्र करते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति भारत की प्रशंसा करने वाले पहले नेता थे। पीएम मोदी ने यूक्रेन पर हमले के संदर्भ में पुतिन से कहा था कि यह समय युद्ध का नहीं है।

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UNSC के लिए रूस का मिला समर्थन
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को स्थायी सदस्या का समर्थन किया। यूएनजीए सत्र को संबोधित करते हुए सर्गेई लावरोव ने कहा कि रूस भारत को प्रमुख अंतरराष्ट्रीय अभिनेता के रूप में देखता है और सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए योग्य उम्मीदवार मानता है।

कोरोना में मदद के लिए कई देशों ने जताया आभार
जमैका की विदेश मंत्री कामिना जे स्मिथ ने COVID-19 महामारी के दौरान सहायता के लिए भारत के प्रति आभार व्यक्त किया। स्मिथ ने कहा कि महामारी के दौरान टीकों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारत सरकार और भारतीयों का आभारी हूं।

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वहीं, गुयाना के विदेश मंत्री ह्यूग हिल्टन टॉड ने भी UNGA में भारत की सराहना की। उन्होंने कहा, “गुयाना जैसे छोटे देशों को भारत से अत्यधिक लाभ हुआ है। हमेशा भारत एक ऐसी अर्थव्यवस्था रही है जो मानव विकास पर ध्यान केंद्रित करती है।”

गुरुवार को पुर्तगाली प्रधानमंत्री एंटोनियो कोस्टा ने यूएनएससी सुधार का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत, ब्राजील और अफ्रीका महाद्वीप का प्रतिनिधित्व शामिल होना चाहिए। महासभा को संबोधित करते हुए कोस्टा ने एक सुरक्षा परिषद की वकालत की जिसमें सुरक्षा का व्यापक दृष्टिकोण शामिल हो और छोटे देशों को उचित प्रतिनिधित्व मिले।

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