
गजब भयो रामा, जुलम भयो रामा। शाहरुख खान की फिल्म ‘पठान’ के गाने ‘बेशरम रंग’ ने सबके दिमाग के तार ढीले कर दिए हैं। कुछ खिसिया गए तो कुछ अगड़म-बगड़म बोल रहे। बड़े और नाम एक्टर्स तक इसके खिलाफ हो गए। जगह-जगह लोगों ने विरोध प्रदर्शन भी करना शुरू कर दिया। दीपिका पादुकोण की ‘बिकिनी’ पर मचे हंगामें के बीच बॉलीवुड की दिग्गज अदाकारा आशा पारेख ने भी रिएक्ट किया है और खुलकर मन की भड़ास निकाली है।
अपनी अदायगी और नजाकत के लिए जानी-जाने वाली एक्ट्रेस आशा पारेख (Asha Parekh) के लाखों दीवाने हैं। उनकी खूबसूरती पर लोग फिदा थे। इसी साल उन्हेंने दादा साहब फाल्के अवॉर्ड से भी नवाजा गया था। अब उन्होंने आज तक डॉट कॉम से खास बातचीत में अपनी लाइफ की जर्नी पर तो बात की थी। साथ ही पठान विवाद पर भी बोलीं। उन्होंने फिल्मों से गायब हो रही मेलोडी औ प्यार का भी जक्र किया।
हिरोइनों को मिल रहा बहुत कम स्क्रीन स्पेस
आशा पारेश ने मौजूदा फिल्मों की हालत पर कहा- जो एंटरटेनमेंट फिल्में होती हैं, उसमें बेचारी एक्ट्रेसेस को कुछ करने के लिए ही नहीं मिलता है। हां कुछ विमेन ओरिएंटेड फिल्में हैं जो कि काबिलेतारीफ हैं। लेकिन आज जो बड़ी-बड़ी फिल्में बन रही हैं, उसमें एक्ट्रेसेस का रोल बहुत छोटा हो गया है। उन्हें कम स्क्रीन स्पेस मिल रहा है। ये मेल डॉमिनेटेड इंडस्ट्री रही है इसलिए मैं इसमें बदलाव देखना चाहती हूं।
फिल्मों की कहानी अब मरती जा रही है
आशा पारेश ने कहा कि सिनेमा में अब प्यार और मेलोडी दोनों गी गायब हो गए हैं। कहानी मरती जा रही है। फिल्म की आत्मा है ही नहीं। अगर कंटेंट अच्छा न हो तो वो नहीं चलती हैं। मेरी फिल्म चिराग, जिसमें मैंने अंधी का किरदार निभाया था। वह मूवी मुझे बहुत पसंद थी। लेकिन दर्शकों को ये पसंद नहीं आई। लोगों का कहना था कि मुझे इसमें अंधा क्यों बना दिया गया है। उस समय भी दर्शकों के मन को समझ पाना बेहद मुश्किल था।





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