सदाशिवलिंग की पूजा के ये 8 खास नियम
श्रम वीर भारत न्यूज़/astrology and vaastu
शिवलिंग को पंचामृत से स्नान कराने के बाद राख सहित
सभी शिव मंदिरों का गर्भगृह गोलाकार आधार के बीच एक घुमावदार और अंडाकार शिवलिंग के रूप में प्रकट होता है। यह बात तो सभी जानते हैं, लेकिन आप शायद नहीं जानते कि उसकी पूजा कैसे करें। यहां पाठकों के लिए शिवलिंग की पूजा के विशेष नियम दिए गए हैं
शिवलिंग को पंचामृत से स्नान कराने के बाद राख सहित उस पर 3 क्षैतिज रेखाओं का तिलक लगाएं।
सदा शिवलिंग पर हल्दी नहीं चढ़ानी चाहिए,
बल्कि जलधारी पर हल्दी का भोग लगाया जा सकता है।
- सदा शिवलिंग पर दूध, जल और काले तिल चढ़ाकर बेलपत्र चढ़ाएं।
- सदा शिवलिंगमे केवड़ा और चंपा के फूल न चढ़ाएं। किसी पुजारी से पूछकर ही गुलाब और गेंदा चढ़ाएं।
- कनेर, धतूरा, आक, चमेली, जूही के फूल चढ़ा सकते हैं।
- सदा शिवलिंग पर चढ़ाए गए नेवेध को स्वीकार नहीं किया जाता है, सामने रखा गया नेवेध अवश्य लिया जा सकता है।
- सदा शिवलिंग नहीं, शिव मंदिर की आधी परिक्रमा ही की जाती है।
- सदा शिवलिंग की पूजा करने से पहले माता पार्वतीजी की पूजा करनी चाहिए।
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पंडित मनु मिश्रा ज्योतिष आचार्य सिद्धि रत्न एवं ज्योतिष ज्योतिष की सभी समस्याओं के लिए संपर्क करें सिद्धि रत्न एवं ज्योतिष






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