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निर्वाचन अधिकारियों की सुरक्षा पर चिंता: चुनाव आयोग ने बंगाल पुलिस को भेजा सख्त पत्र

कोलकाता 
पश्चिम बंगाल में गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) के बीच चुनाव आयोग ने कोलकाता पुलिस को पत्र लिखकर चुनाव अधिकारियों की सुरक्षा के प्रति चिंता जताई है। चुनाव आयोग ने कोलकाता पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर कहा है कि एसआईआर की ड्यूटी में तैनात चुनाव अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। पत्र में कहा गया, जानकारी में आया है कि 24 नवंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यालय की सुरक्षा तोड़ी गई। इसके अलावा मुख्य चुनाव आयुक्त, अडिशनल चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर, जॉइंट चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर और डिप्टी चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर की सुरक्षा से भी खिलवाड़ किया गया है।
 
पत्र में आगे कहा गया कि चुनाव आयोग ने पहले ही घटना का संज्ञान लिया है और चीफ इलेक्शन ऑफिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है। उनके कार्यालय और आवास दोनों की सुरक्षा पुख्ता की जाए। इसके अलावा एसआईआर की प्रक्रिया और डेटा की सुरक्षा के लिए भी पर्याप्त सुरक्षा के उपाय किए जाएं। चुनाव आयोग ने कहा कि निर्देश के बाद क्या कदम उठाए गए इसकी जानकारी 48 घंटे में दी जाए।

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बता दें कि बीएलओ अधिकार रक्षा समिति के सैकड़ों सदस्यों ने सोमवार को कॉलेज स्क्वायर से सीईओ कार्यालय तक मार्च निकाला और सीईओ कार्यालय के सामने धरना दिया था। स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब पुलिस के मानवीय दीवार की तरह खड़े होने के बावजूद उनमें से कुछ ने गेट तोड़ने की कोशिश की। भीड़भाड़ में कुछ प्रदर्शनकारी दफ्तर के अंदर घुस गए और वहीं धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया।

सोमवार रात करीब 11 बजे उस समय गतिरोध की स्थिति पैदा हो गई, जब केएमसी पार्षद सजल घोष के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं का एक समूह नारेबाजी करते हुए मौके पर पहुंचा और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पर चुनाव आयोग के अधिकारियों को डरा-धमकाकर चल रही एसआईआर प्रक्रिया को विफल करने का प्रयास करने का आरोप लगाया।

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एसआईआर एनआरसी से भी ज्यादा खतरनाक- ममता बनर्जी
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को दावा किया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के पीछे असली मंशा राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) है। संविधान दिवस के अवसर पर रेड रोड स्थित बी. आर. आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में बनर्जी ने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी लोगों की नागरिकता पर सवाल उठाया जा रहा है।

इससे पहले, उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि जब लोकतंत्र दांव पर हो, धर्मनिरपेक्षता ‘‘खतरे में हो’’ और संघवाद को ‘‘ध्वस्त किया जा रहा हो’’, तो लोगों को संविधान द्वारा प्रदत्त मूल्यवान मार्गदर्शन की रक्षा करनी चाहिए। बनर्जी ने कहा कि संविधान राष्ट्र की रीढ़ है, जो भारत की संस्कृतियों, भाषाओं और समुदायों की विविधता को कुशलतापूर्वक एक साथ पिरोता है।

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