77 साल की दादी हर महीने कमा रहीं 3 लाख, लॉकडाउन में शुरू किया था बिजनेस
News श्रम वीर भारत न्यूज़
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16 mins ago

77 Year Old Women Start Business of Homemade Gujarati Food Earn 2-3 Lakh Per Month-77वर्षीय उर्मिला जमनादास आशेर हर दिन सुबह 5.30 बजे अपना दिन शुरू करती हैं. वह अपनी बहू, राजश्री और पोते हर्ष के लिए चाय और नाश्ता बनाती है और फिर अखबार पढ़ती हैं. इसके बाद, वह मुंबई के लोगों द्वारा दिए गए खाने के आर्डर को पूरा करने के लिए स्नैक्स तैयार करना शुरू कर देती हैं, जो उनके रेस्तरांनुमा दूकान ‘गुज्जू बेन ना नास्ता’ में उनके स्वादिष्ट भोजनका स्वाद लेनेआते हैं.
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शादी के कुछ साल बाद ही इमारत ढहने से उनकी ढाई साल की बेटी की मौत हो गई. उसके कुछ सालों बाद उनके दोनों बेटों की भी डेथ हो गई. उनके एक बेटे को ब्रेन ट्यूमर था और दूसरे की मौत हार्ट अटैक की वजह से हुई. ऐसे में उर्मिला जमनादास के पास बस पोता हर्ष ही बचा.
हर्ष ने 2012 में एमबीए पूरा किया, और भारत में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ओमान मंत्रालय के साथ काम किया. 2014 में, उन्होंने वाणिज्य दूतावासों और व्यापारियों के वाणिज्य दूतावासों के साथ सहयोग देने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी.
हालांकि, 2019 में एक दुर्घटना में हर्ष ने अपना ऊपरी होंठ खो दिया. हर्ष ने बेटर इंडिया को बताया कि इस हादसे के बाद से वो अपने घर से बाहर निकलने में परहेज करने लगे थे और डिप्रेशन में चले गए थे. ऐसे में वो घर की आर्थिक सहायता भी नहीं कर पा रहे थे. ऐसे में दादी उर्मिला जमनादास ने उनकी हिम्मत बढ़ाई और हौंसला दिया कि तुम पढ़े लिखे मेहनतकश हो खुद पर भरोसा रखो.
राजश्री सहित दो लोगों की मदद से वह दोपहर तक ऑर्डर देना शुरू कर देती है. देखा जाए तो यह किसी आम भारतीय महिला की दिनचर्या ही प्रतीत होती है जो घर पर ही खाने का बिजनेस चलाती हैं. लेकिन उर्मिला की कहानी इससे काफी अलग है. जीवन की त्रासदी, दर्द और संघर्ष से भरे जीवन यापन के लिए उर्मिला जमनादास ने 77 साल की उम्र में अपना फूड बिजनेस शुरू किया.
शादी के कुछ साल बाद ही इमारत ढहने से उनकी ढाई साल की बेटी की मौत हो गई. उसके कुछ सालों बाद उनके दोनों बेटों की भी डेथ हो गई. उनके एक बेटे को ब्रेन ट्यूमर था और दूसरे की मौत हार्ट अटैक की वजह से हुई. ऐसे में उर्मिला जमनादास के पास बस पोता हर्ष ही बचा.
हर्ष ने 2012 में एमबीए पूरा किया, और भारत में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ओमान मंत्रालय के साथ काम किया. 2014 में, उन्होंने वाणिज्य दूतावासों और व्यापारियों के वाणिज्य दूतावासों के साथ सहयोग देने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी.
हालांकि, 2019 में एक दुर्घटना में हर्ष ने अपना ऊपरी होंठ खो दिया. हर्ष ने बेटर इंडिया को बताया कि इस हादसे के बाद से वो अपने घर से बाहर निकलने में परहेज करने लगे थे और डिप्रेशन में चले गए थे. ऐसे में वो घर की आर्थिक सहायता भी नहीं कर पा रहे थे. ऐसे में दादी उर्मिला जमनादास ने उनकी हिम्मत बढ़ाई और हौंसला दिया कि तुम पढ़े लिखे मेहनतकश हो खुद पर भरोसा रखो.





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