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एमपी में नई रेललाइन प्रोजेक्ट: 108 गांवों की जमीन अधिग्रहित, 2030 तक पूरा होगा काम

इंदौर
मध्य प्रदेश के इंदौर से बुदनी के बीच बन रही नई ब्रॉडगेज रेल लाइन रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। पहले से ही करीब पांच साल देरी का सामना कर रही इस महत्वाकांक्षी परियोजना की प्रगति जमीन अधिग्रहण की सुस्त प्रक्रिया के कारण थमी हुई है। कई गांवों में मुआवजा और सीमांकन संबंधी औपचारिकताएं पूरी नहीं हो पाने से निर्माण कार्य तय गति से आगे नहीं बढ़ पा रहा। हालात ऐसे हैं कि अब इस रेल लाइन को पूरा करने का लक्ष्य बढ़ाकर साल 2030 तक कर दिया गया है। जिससे क्षेत्रवासियों को सीधी रेल कनेक्टिविटी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा।

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परियोजना में खर्च हो चुके हैं 2 हजार करोड़
यह 205 किमी का सेक्शन 342 किमी लंबी इंदौर-जबलपुर नई विद्युत रेल लाइन परियोजना का अहम हिस्सा है, जिसे 2016-17 में मंजूरी मिली और 2018 में काम शुरू हुआ। शुरुआती लक्ष्य 2024-25 था, लेकिन फंड की कमी, जमीन अधिग्रहण और न्यायिक अड़चनों के कारण अब नई समयसीमा 2029-30 तय की गई है। करीब 7,400 करोड़ रुपए की इस परियोजना पर अब तक लगभग 2,000 करोड़ खर्च हो चुके हैं और प्रगति 30% दर्ज की गई है। निर्माण कार्य रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) द्वारा तीन पैकेज में किया जा रहा है-मांगलिया गांव से खेरी, खेरी से पीपलिया नानकर और पीपलिया नानकर से बुदनी का काम चल रहा है।

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75 किमी कम होगा सफर
नई लाइन बनने के बाद इंदौर से जबलपुर की दूरी करीब 75 किमी कम हो जाएगी। अभी यात्रियों को भोपाल होकर लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। नई कनेक्टिविटी से समय की बचत होगी और ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 130 किमी प्रति घंटा तक हो सकेगी। इससे मालवा और महाकौशल क्षेत्र के यात्रियों को सीधा फायदा मिलेगा, साथ ही माल परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।
 
परियोजना में 80 सुरंगें
परियोजना में 80 बड़े पुल और दो सुरंगें (1.24 किमी और 8.64 किमी) प्रस्तावित हैं। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस रूट पर कोई लेवल क्रॉसिंग नहीं होगी, अंडरपास और ओवरब्रिज बनाए जाएंगे। सुरंगों का डिजाइन वन्यजीव क्षेत्र को सुरक्षित रखते हुए तैयार किया गया है। योजना के अनुसार 2027-28 में बुदनी से सलकनपुर, 2028-29 में मांगलिया गांव से खेरी और 2029-30 तक पूरा ट्रैक तैयार करने का लक्ष्य है।

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108 गांवों की जमीन अधिग्रहित
कुल 205 किमी में से 186 किमी राजस्व और सरकारी भूमि का अधिग्रहण पूरा हो चुका है। शेष वन क्षेत्र की अनुमति मार्च 2025 में मिल गई। 108 गांवों में अधिग्रहण कर लगभग 721 करोड़ रुपए मुआवजा दिया जा चुका है।

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