
रायपुर । छत्तीसगढ़ में एक रैपिड टेस्ट किट से पांच लोगों की जांच की जा रही है। फिर पांच लोगों के सैंपलिंग में कोरोना पॉजिटिव मरीज मिलता है तो उन 5 मरीजों की फिर से अलग-अलग जांच की जाती है। इसके बाद जिस व्यक्ति में कोरोना संक्रमण है, उसकी पहचान की जाती है। छ्त्तीसगढ़ के एक स्वास्थ्य अधिकारी के मुताबिक, बाकी के चार मरीजों को भी जांच के दायरे में लाकर उन्हें एकांतवास कर दिया जा रहा है। इस तरह जांच पर अब सवाल उठने लगे हैं।
रैपिड टेस्ट किट की कमी की वजह से क्या पांच लोगों की जांच एक साथ की जा रही है। यह पूछे जाने पर कोरोना नियंत्रण अभियान के छत्तीसगढ़ नोडल अधिकारी डा. अखिलेश त्रिपाठी ने इस बारे में सफाई देते हुए बताया कि रैपिड टेस्ट किट जो है, वह सर्विलांस के लिए एक टूल है। उसके प्रयोग पर हमारे यहां कोई रोक नहीं है। चाइना वाला तो हमने वापस कर दिया था। उसके बाद कोरियन कंपनी से हमने खरीदा था। यह सिर्फ सर्विलांस पर्पस के लिए लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, यह एंटीबॉडी टेस्ट डाइग्नोस्टिक टेस्ट नहीं है। दूसरी बात पूल सैंपलिंग की जो बात की जा रही है, वह आरटी-पीसीआर टेस्ट के लिए जो स्वैब सैंपल लेते हैं। पूल सैंपल के लिए जो हमारे यहां जो स्टैंडर्ड बना है, वह तीन सैंपलों को मिलाकर एक सैंपल की ब्लीडिंग दी जाती है। अगर इन तीनों के ब्लड रिपोर्ट में कोरोना पॉजिटिव पाया जाता है, तो फिर से उन तीनों पार्टनर का अलग अलग सैंपल लिया जाता है। ताकि यह पता चल सके कि तीन लोगों में कौन कोरोना पॉजिटिव है।
डॉ. त्रिपाठी के मुताबिक, आईसीएमआर की गाइडलाइन में तीन लोगों की सैंपलिंग का निर्देश है। उन्होंने कहा कि देश में आईसीएमआर से ऊपर कोई नहीं है। हम उनके गाइडलाइन के हिसाब से ही सैंपलिंग कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि भारत ने चीन से करीब 10 लाख किट मंगाई थी। छत्तीसगढ़ ने भी चीनी कंपनियों से काफी संख्या में रैपिड टेस्ट किट के ऑर्डर किये थे, लेकिन बाद में जिस कंपनी को टेंडर दिया गया था, उसने और अधिक पैसे की डिमांड की। जिसके बाद ऑर्डर कैंसल हो गया था।
छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह ने बाद में बताया कि छत्तीसगढ़ ने भारत में स्थित साउथ कोरिया की कंपनी से 75 हजार रैपिड टेस्ट खरीदे हैं। लेकिन रैपिड बॉडी टेस्ट किट जांच को लेकर देशभर में अभी तक असमंजस का माहौल है। छत्तीसगढ़ में भी रैपिड टेस्ट किट से पॉजिटिव मरीज मिलने पर उनके सैंपलों के फिर से एम्स में जांच के लिए भेजा जाता है। एम्स की जांच में पॉजिटिव मिलने के बाद ही सरकार मरीजों की घोषणा करती है।





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