
नई दिल्ली । भारत और चीन की सीमा लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर पिछले माह चीनी सैनिकों के साथ हुई कई बार भिड़ंत के बाद भारत और चीन ने अतिरिक्त सैन्य टुकड़ियों को तैनात किया है। सीमा पर तनाव को देखते हुए सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे अपने एक बेहद गोपनीय दौरे पर लद्दाख पहुंचे और एलएसी की सुरक्षा व्यवस्था के बारे में समीक्षा की है।
सेना प्रमुख नरवणे ने शीर्ष अधिकारियों के साथ मुलाकात भी की और वहां के हालात का जायजा लिया। आर्मी चीफ ने लेह स्थित 14 सैन्यदलों के मुख्यालय का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने उत्तरी कमांड के मुख्य अधिकारियों के साथ चर्चा की और जाना कि ताजा हालात कैसे हैं ये जानने की कोशिश की।
सेना प्रमुख नरवाणे भारत और चीन के बीच संवेदनशील क्षेत्र वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) की सुरक्षा समीक्षा के लिए लद्दाख में 14 कोर के मुख्यालय, लेह का दौरा किया। भारत और चीनी सैनिकों के आमने-सामने आने के बाद लद्दाख सीमा पर उनका यह गोपनीय दौरा इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि विदेश मंत्रालय ने एक दिन पहले ही अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि सभी भारतीय गतिविधियां पूरी तरह वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी भारतीय क्षेत्र में हो रही हैं। इस संबंध में चीन का दावा सही नहीं है। भारतीय सेना को एलएसी का पूरा ध्यान है तथा वह इसका पूरी तरह पालन करती है। वास्तव में चीन की ओर से ही हाल में ऐसी गतिविधियां हुई हैं जिनसे भारतीय टुकड़ियों की नियमित गश्त में बाधा पैदा होती है।
दरअसल चीन का आरोप था कि भारतीय सैनिकों ने तनाव की शुरुआत की और लद्दाख और सिक्किम सेक्टरों में एलएसी को पार किया। चीनी सेना ने भारतीय सीमा पर गश्त में बाधा डालने का आरोप लगाया। हालांकि इन घटनाओं के बाद भारत और चीन ने सीमा पर लद्दाख की गैलवान घाटी में अतिरिक्त सेनाएंं तैनात की हैं। भारत ने सीमा पर सैन्य स्तर बढ़ाने के साथ ही वहां अपनी मौजूदगी बनाए रखने के लिए टेंट लगाकर गालवान घाटी में अस्थायी स्थान बनाए हैं।
हालांकि इससे पहले सेना प्रमुख नरवणे कह चुके हैं कि उत्तर सिक्किम और पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई इन घटनाओं का किसी भी घरेलू या अंतरराष्ट्रीय स्थिति से कोई संबंध नहीं है। इस तरह की घटनाएं वास्तविक नियंत्रण रेखा को बहुत अच्छी तरह से परिभाषित न किए जाने की वजह से अतीत में भी होती रही हैं और अब फिर से हुई हैं।
उन्होंने यह भी कहा था कि वास्तव में भारतीय और चीनी सैनिक 10 अलग-अलग स्थानों पर प्रतिदिन बिल्कुल सामान्य रूप से मिलते हैं। दोनों देशों के सैनिकों में भिड़ंत केवल एक या दो स्थानों पर समय-समय पर होती रहती हैं। यह तब भी होता है जब बार्डर पर कमांडरों की तैनाती में बदलाव किया जाता है।
इसके विपरीत सेना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय कमांडरों के बीच बातचीत इस बार सीमा पर तनाव कम करने में विफल रही है और राजनयिक चैनल गतिरोध खत्म करने के लिए काम कर रहे हैं।





Users Today : 7
Users This Month : 51
Total Users : 233589
Views Today : 7
Views This Month : 76
Total views : 54835



