कोलकाता। भारतीय जनता पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष ने आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल सरकार कोरोना संकट के समय लोगों के हित में काम करने के बजाय केंद्र सरकार के समक्ष केवल हाथ फैलाकर खड़ी हो जा रही है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से बात‑बात पर मांगने की मानसिकता त्यागकर ममता बनर्जी सरकार को काम करके दिखाना चाहिए। घोष ने केंद्र सरकार द्वारा घोषित योजनाओं का स्वागत करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने कांग्रेस शासन के समय से चली आ रही आर्थिक सुधार को गति दी है। सरकार की योजना है कि कैसे सरकार और आम लोगों की आय बढ़े। कोरोना के कारण कई क्षेत्र में लोगों के रोजगार के अवसर कम हुए हैं। ऐसे लोगों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने कहा कि केवल हाथ में पैसे दे देने से समस्या का समाधान नहीं हो जायेगा। केंद्र सरकार राज्य सकार को आवश्यक राशि देती है। राज्य सरकार न तो खर्च कर पाती है और ना ही उसका हिसाब ही देती है। मनरेगा से 2.5 करोड़ लोगों को जोड़ा जायेगा। कई करोड़ श्रम दिवस तैयार किया गया है। खेती, पशुपालन, मत्स्य पालन आदि के लिए लोन की व्यवस्था की गयी है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार आर्थिक सुधार ठीक ‑ठाक लागू करती है, तो 0.05 फीसदी अतिरिक्त लाभ मिलेगा। 6000 करोड़ रुपये अतिरिक्त मिलेंगे।
उन्होंने कहा कि अब राज्य सरकार का कोई जीएसटी बकाया नहीं है। सभी मिटा दिया गया है। मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के साथ मुलाकात के बाद कुछ और कहती हैं, लेकिन बाद में कुछ और कहती हैं। घोष ने कहा कि बंगाल सरकार की मंशा लोगों के हित में काम करने की नहीं है।





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