उत्तरप्रदेश
बीते दिनों सोशल मीडिया पर एक बच्चे का वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें वह कुत्ते के काटने के बाद भौंकने जैसी हरकत करता दिखाई दे रहा था। इस घटना ने लोगों के बीच रेबीज को लेकर चिंता बढ़ा दी।
हालांकि, जांच और चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद सामने आया कि बच्चे को रेबीज नहीं, बल्कि एक दुर्लभ मानसिक स्वास्थ्य समस्या है।
रेबीज के अन्य लक्षण मौजूद नहीं थे
जानकारी के अनुसार, मीरजापुर के इस बच्चे को प्रारंभिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। डॉक्टरों ने पाया कि भौंकने और घबराहट (पैनिक) के अलावा उसमें रेबीज के अन्य लक्षण मौजूद नहीं थे। एक वायरल वीडियो में वह सामान्य रूप से लोटे से पानी पीते हुए भी नजर आया, जो रेबीज के लक्षणों से मेल नहीं खाता।
आईसीडी-एफ44 की पुष्टि हुई
चिकित्सकीय जांच में डिसोसिएटिव कन्वर्जन डिसऑर्डर (आईसीडी-एफ44) की पुष्टि हुई। विशेषज्ञों के अनुसार, यह एक मानसिक विकार है जो किसी गहरे डर या आघात की प्रतिक्रिया के रूप में सामने आता है। सही उपचार से यह स्थिति ठीक हो सकती है।
दैनिक जागरण की पड़ताल में भी पुष्टि हुई कि वायरल वीडियो में दिख रहा बच्चा अब घर पर स्वस्थ हो रहा है और उसमें भौंकने जैसी कोई हरकत नहीं देखी जा रही है। उसे अस्पताल से स्वस्थ घोषित कर दिया गया है।
पांच महीने पहले कुत्ते ने काट लिया था
कछवां के जोगीपुर वार्ड निवासी भाईलाल के 13 वर्षीय बेटे करन को करीब पांच महीने पहले, नवंबर में वाराणसी के हरहुआ में खेलते समय एक कुत्ते ने काट लिया था। उस समय उसे एंटी-रेबीज टीका लगाया गया, लेकिन डर के कारण वह पूरा टीकाकरण नहीं करा पाया।
14 मार्च को अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई और वह असामान्य व्यवहार करने लगा। परिजन उसे कई अस्पतालों में लेकर गए, जहां से उसे मीरजापुर और फिर बीएचयू वाराणसी रेफर किया गया। बाद में हरहुआ के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के दौरान उसे राहत मिली।
रेबीज से संक्रमित व्यक्ति भौंकने नहीं लगता
डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि रेबीज से संक्रमित व्यक्ति भौंकने नहीं लगता। इस मामले में बच्चे की स्थिति का कारण मानसिक आघात, अधूरा टीकाकरण और भय का संयुक्त प्रभाव माना गया है। यह घटना समाज में रेबीज को लेकर फैली भ्रांतियों को भी उजागर करती है।
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को गंभीरता से लेना जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को गंभीरता से लेना जरूरी है, क्योंकि कई बार ये शारीरिक लक्षणों के रूप में सामने आती हैं। परिजनों ने भी लोगों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें। समय पर सही इलाज और देखभाल से करन अब धीरे-धीरे पूरी तरह स्वस्थ हो रहा है।





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