
नई दिल्ली। मोदी सरकार की तरफ से घोषित आर्थिक पैकेज को निराशाजनक बताने वाली कांग्रेस पार्टी ने गुरुवार को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा विशेष पैकेज की दूसरी कड़ी के ऐलान को भी निर्रथक बताया है। विपक्षी पार्टी का कहना है कि केंद्र सरकार कोरोना संकट से पैदा हुए हालात से निपटने में पूरी तरह विफल रही है।
कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि कोरोना संकट और लॉकडाउन के बीच पिस रही जनता को राहत पहुंचाने के नाम पर सिर्फ मजाक किया गया है। उन्होंने कहा कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने आज बेलआउट पैकेज की दूसरी किश्त पेश की, जो सरकार की अज्ञानता, अहंकार और असंवेदनशीलता का एक बेजोड़ प्रदर्शन थी।
मनीष तिवारी ने कहा कि विशेष आर्थिक पैकेज का मतबल होता है कि लोगों के हाथों में अर्थ डाला जाए लेकिन यहां तो वादे और घोषणाओं के आगे की कोई बात ही नहीं है। सरकार ने प्रवासी श्रमिकों के लिए दो महीने तक मुफ्त खाद्यान्न का ऐलान किया। मतलब सरकार चाहती है कि मजदूर अगले दो माह तक पंगु की तरह सिर्फ मुफ्त के अन्न खाएं और सभी समस्याओं को भूल जाएं। उन्होंने पूछा कि क्या यही केंद्र का ‘आत्मनिर्भर भारत’ का पैमाना है। उन्होंने कहा कि लगता है सरकार की नजर में लाखों प्रवासी मजदूरों की समस्या का हल सिर्फ पांच किलो मुफ्त अनाज है।
इस दौरान कांग्रेस प्रवक्ता ने केंद्र के आठ करोड़ मजदूरों के आंकड़े पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 2011 की जनसंख्या के मुताबिक देश में 11 करोड़ मजदूर हैं। पिछले दस साल में यह आंकड़ा बढ़कर दो गुना हो गया लेकिन वित्तमंत्री ने मुफ्त खाद्यान्न की घोषणा सिर्फ आठ करोड़ मजदूरों के लिए ही की है। ऐसे में शेष लोगों को लेकर सरकार की क्या योजना है।
वहीं उन्होंने एसडीआरएफ में राज्यों को 11 हजार करोड़ रुपये दिए जाने के मुद्दे पर कहा कि यह कोई उपकार या दान नहीं है बल्कि ये तो राज्यों का ही पैसा है। फिर सरकार अपने ऐलान में ऐसे क्यों जताती है कि यह उसकी विशेष अनुकम्पा का नतीजा है। वहीं तिवारी ने इस पूरे आर्थिक पैकेज को लोन योजना का नाम देते हुए कहा कि यहां सरकार लोगों की मदद करने के बजाय लोन मेला लगाने में





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