नई दिल्ली । देश में महामारी का रूप ले चुकी कोरोना सहित अन्य वायरल संक्रमणों के उपचार के लिए एस.एन.बोस नेशनल सेंटर फार बेसिक साइंसेज (एसएनबीएनसीबीएस) कोलकाता के वैज्ञानिकों ने नैनो मेडिसिन तैयार किया है। इसके जरिए शरीर में आक्सीडेटिव स्ट्रेस बदलने से कई प्रकार की बीमारियों का इलाज संभव है क्योंकि स्थिति के अनुसार नैनो मेडिसिन शरीर में रिएक्टिव आक्सीजन स्पेसीज (आरओएस) को घटा या बढ़ा देती है।
यह मेडिसिन नींबू अर्क के साथ मैगनीज सॉल्ट से निकाले गए नैनो पार्टिकल्स को जोड़ती है। नैनो टेक्नोलॉजी की तरकीबों का उपयोग करते हुए मैगनीज और साइट्रेट का महत्वपूर्ण मिश्रण नैनो मेडिसिन का उत्पादन करता है। कृत्रिम रूप से निर्मित्त नैनो मेडिसिन हमारे शरीर के उत्तकों में रिडक्शन एंड ऑक्सीडेशन प्रोसेसेज (रेडॉक्स) के संतुलन को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण पाया गया। कोशिकाओं में रेडॉक्स प्रतिक्रियाएं ऑक्सीजन जोड़ती या हटाती हैं जो कोशिकाओं में ऊर्जा पैदा करने जैसी कई प्रक्रियाओं के लिए अनिवार्य हैं। रेडॉक्स प्रतिक्रियाएं आरओएस नामक कोशिकाओं के लिए हानिकारक उत्पादनों का भी निर्माण कर सकती हैं जो परिपक्वन प्रक्रिया में तेजी लाते हुए तत्काल लिपिड (वसा), प्रोटीन और न्यूक्लिएक एसिड को ऑक्सीडाइज करती हैं। इस प्रकार आरओएस या ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस की नियंत्रित वृद्धि हमारी प्रतिरक्षी कोशिकाओं को अपना प्राकृतिक कार्य अधिक प्रभावी ढंग से करने में सहायता करती है।
नवजात शिशुओं में पीलिया सहित कई रोगों के उपचार में इसका प्रयोग हो सकता है। अभी हाल में ही संस्थान ने बताया कि नैनोमेडिसिन दिए जाने के बाद सवंर्द्धित ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बिलरुबिन (पीलिया पैदा करने वाले टॉक्सिक मोलेक्यूल) को तोड़ सकते हैं और हाइपर बिलरुबिनेमिया (पीलिया) का उपचार कर सकते हैं। चूहों पर किए गए एक परीक्षण में नैनो मेडिसिन सुरक्षित व त्वरित पाए गए बिलरुबिन के स्तर को ढाई घंटों के भीतर नीचे ले आया जो स्तनधारियों में आरओएस की नियंत्रित वृद्धि की इस क्षमता को कोविड‑19 सहित वायरल संक्रमणों को नियंत्रित करने में नैनो मेडिसिन के प्रयोग की नई संभावनाओं को दर्शाता है। हाईड्रोजन पेरोक्साइड जो आरओएस के वर्ग का है, की स्थानीय दवा की अनुशंसा कोविड‑19 से बचने के एक तरीके के रूप में की गई है। एक नेबुलाइजर के जरिए श्वसन मार्ग में हाइड्रोजन पेरोक्साइड के उपयोग द्वारा अत्यधिक आरओएस अर्जित किया गया। इसकी सलाह कोविड‑19 को निष्क्रिय करने के लिए दी जाती है। चूंकि हाइड्रोजन पेरोक्साइड का प्रत्यक्ष प्रयोग सामान्य शरीर कोशिकाओं के प्रत्यक्ष आक्सीडेशन सहित कई प्रकार की जटिलताएं पैदा करता है। ऐसे में नैनोमेडिसिन द्वारा रसायन का विस्थापन लाभदायक सिद्ध होगा।






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