
सिडनी । कोविड-19 यानि कोरोना वायरस के कहर से बच्चे सबसे अधिक संक्रमित हे सकते है। वैज्ञानिकों ने बच्चों पर मंडरा रहे बड़े खतरे को लेकर चेतावनी दी है। संयुक्त के राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ) के अलावा अमेरिका के जॉन हापकिन्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने चेतावनी जारी की है कि जल्द से जल्द कोरोना संक्रमण पर काबू नहीं पाया गया तो विश्व के सभी देशों की स्वास्थ्य प्रणाली कमजोर हो जाएगी और स्वास्थ्य सेवाएं बाधित होने का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर होगा जिसके चलते हर रोज़ 6 हजार से ज्यादा बच्चों की मौत हो सकती है। यूनिसेफ के मुताबिक नियमित स्वास्थ्य सेवाएं रुक जाने के चलते मरने वाले बच्चों में बड़ी संख्या 5 साल से कम उम्र वालों की होगी। दुनिया के कई देशों में लॉकडाउन के चलते लोगों को भोजन की उपलब्धता भी घटी है। इसके चलते मां एवं शिशु के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जाहिर की गई है।
उधर, अमेरिका की जॉन हापकिन्स यूनिवर्सिटी के शोध में दावा किया गया है कि अगले छह महीनों में पांच साल तक की उम्र के 2.53 लाख बच्चों की अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। जॉन हापकिन्स यूनिवर्सिटी के शोध में कहा गया है 118 निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में स्वास्थ्य सेवाएं कोरोना वायरस के संक्रमण के उपचार पर केंद्रित होने से मातृ एवं शिशु से जुड़ीं चिकित्सा सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि इन स्थितियों के न्यूनतम प्रभाव से आकलन करते हैं तो 9.8 से 18.5 फीसदी तक मृत्यु दर में इजाफा होने की आशंका है। इससे छह महीनों में पांच साल तक के 2,53,500 अतिरिक्त शिशुओं की मौतें होंगी। इस अवधि में 12,200 माताओं की मौतें बढ़ेंगी।
यदि सबसे खराब स्थिति को मानकर आकलन किया जाए तो 39.3 से 51.9 फीसदी तक मौतें बढ़ सकती हैं। इससे 11,57,000 शिशुओं तथा 56,700 माताओं की अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। यूनिसेफ ने इस वैश्विक महामारी से प्रभावित बच्चों को मानवीय सहायता मुहैया कराने के लिए 1.6 अरब डॉलर की मदद भी मांगी है। यूनीसेफ ने कहा कि तेजी से बाल अधिकार संकट में तत्काल कार्रवाई नहीं की गई तो पांच साल से कम उम्र के और 6 हजार बच्चों की रोजाना मौत हो सकती है।’ यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक हेनरीटा फोरे ने कहा, ‘स्कूल बंद हैं, अभिभावकों के पास काम नहीं है और परिवार चिंतित हैं।’ उन्होंने कहा, ‘जब हम कोविड-19 के बाद की दुनिया की कल्पना कर रहे हैं, ऐसे में ये फंड संकट से निपटने और इसके प्रभाव से बच्चों की रक्षा करने में हमारी मदद करेंगे।’
उधर, अमेरिका की जॉन हापकिन्स यूनिवर्सिटी के शोध में दावा किया गया है कि अगले छह महीनों में पांच साल तक की उम्र के 2.53 लाख बच्चों की अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। जॉन हापकिन्स यूनिवर्सिटी के शोध में कहा गया है 118 निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में स्वास्थ्य सेवाएं कोरोना वायरस के संक्रमण के उपचार पर केंद्रित होने से मातृ एवं शिशु से जुड़ीं चिकित्सा सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि इन स्थितियों के न्यूनतम प्रभाव से आकलन करते हैं तो 9.8 से 18.5 फीसदी तक मृत्यु दर में इजाफा होने की आशंका है। इससे छह महीनों में पांच साल तक के 2,53,500 अतिरिक्त शिशुओं की मौतें होंगी। इस अवधि में 12,200 माताओं की मौतें बढ़ेंगी।
यदि सबसे खराब स्थिति को मानकर आकलन किया जाए तो 39.3 से 51.9 फीसदी तक मौतें बढ़ सकती हैं। इससे 11,57,000 शिशुओं तथा 56,700 माताओं की अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। यूनिसेफ ने इस वैश्विक महामारी से प्रभावित बच्चों को मानवीय सहायता मुहैया कराने के लिए 1.6 अरब डॉलर की मदद भी मांगी है। यूनीसेफ ने कहा कि तेजी से बाल अधिकार संकट में तत्काल कार्रवाई नहीं की गई तो पांच साल से कम उम्र के और 6 हजार बच्चों की रोजाना मौत हो सकती है।’ यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक हेनरीटा फोरे ने कहा, ‘स्कूल बंद हैं, अभिभावकों के पास काम नहीं है और परिवार चिंतित हैं।’ उन्होंने कहा, ‘जब हम कोविड-19 के बाद की दुनिया की कल्पना कर रहे हैं, ऐसे में ये फंड संकट से निपटने और इसके प्रभाव से बच्चों की रक्षा करने में हमारी मदद करेंगे।’





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