
शंघाई कोऑपरेशन समिट यानी SCO समिट से लौटने के 10 दिन बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सोमवार दोपहर पहली बार नजर आए। जिनपिंग सरकारी टीवी पर दिखे। उनका नजर आना इसलिए अहम हो जाता है कि क्योंकि कई दिन से सोशल मीडिया पर इस तरह की अफवाहें थीं कि जिनपिंग को चीन की सेना (पीपुल्स रिपब्लिक आर्मी या PLA) ने हाउस अरेस्ट कर लिया है।
जिनपिंग पर दुनिया की नजरें इसलिए भी हैं, क्योंकि अगले महीने चाइना कम्युनिस्ट पार्टी यानी CPC की सालाना मीटिंग होनी है। माना जा रहा है कि इस मीटिंग में जिनपिंग के बतौर राष्ट्रपति तीसरे कार्यकाल पर मुहर लग सकती है, हालांकि इसका रास्ता अब मुश्किल होता जा रहा है।
सरकारी कार्यक्रम में नजर आए
जिनपिंग कई दिनों बाद बीजिंग में नजर आए। वो एक सरकारी कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे और इसके फुटेज सरकारी टीवी पर टेलिकास्ट किए गए। कई दिन तक नजर न आने की वजह से जिनपिंग को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे।
चीनी राष्ट्रपति के साथ इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ली किकियांग और पार्टी के कुछ और नेता भी मौजूद थे। इसके अलावा चीनी सेना के कुछ अधिकारी भी यहां नजर आए। इस प्रोग्राम में चीन के आर्थिक विकास पर विचार हुआ।
समरकंद से लौटने के बाद नहीं दिखे
जिनपिंग 16 सितंबर को उज्बेकिस्तान के समरकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। यह दो साल बाद उनकी पहली विदेश यात्रा थी। समरकंद में 2 दिन रुकने के बाद जिनपिंग बीजिंग लौटे और उसके बाद उन्हें किसी कार्यक्रम में नहीं देखा गया।
सोशल मीडिया पर कहा जा रहा था कि चीनी सेना जिनपिंग से सख्त नाखुश है और इसीलिए उन्हें हाउस अरेस्ट कर लिया गया है। हालांकि, चीन में कोरोना के दौर से यह नियम है कि विदेश से लौटने के बाद किसी भी शख्स को 7 दिन क्वारैंटीन रहना होता है। फिलहाल, ऐसा कोई नेता भी नहीं है जो उन्हें सीधे तौर पर चैलेंज कर सकते। कहा जा रहा है कि वो जब तक चाहें राष्ट्रपति बने रह सकते हैं।
अगला महीना अहम
- चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का 5 साल में होने वाला सम्मेलन 16 अक्टूबर से शुरू हो रहा है। माना जा रहा है कि इसमें जिनपिंग को एक बार फिर पांच साल का एक्सटेंशन मिल जाएगा। अमूमन चीन का राष्ट्रपति दो टर्म के लिए ही चुना जाता है, लेकिन जिनपिंग को इस मामले में अपवाद माना जा रहा है।
- कुछ दिन पहले पश्चिमी मीडिया की रिपोर्ट्स में कहा गया था कि जिनपिंग के दौर में चीन के पड़ोसी और दूर के देशों से भी रिश्ते काफी खराब हुए और दुनिया में उसे अवसरवादी ताकत के तौर पर देखा गया। इसके अलावा ताइवान के मुद्दे पर उसका अमेरिका से सीधा टकराव चल रहा है।
- चीन की इकोनॉमी रियल एस्टेट पर काफी निर्भर करती है, लेकिन यह सेक्टर भी काफी कमजोर हो चुका है। इंटरनेशनल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने इकोनॉमिक फ्रंट पर उसकी ग्रोथ रेट 3.5% बताई है। इन सब मामलों को देखें तो पार्टी मीटिंग में जिनपिंग की लीडरशिप पर सवाल उठना तय माना जा सकता है।
- चीन में तख्तापलट की अफवाहें पहले भी कई बार सामने आ चुकी हैं। इस बार एंटी करप्शन कैम्पेन को लेकर जिनपिंग निशाने पर रहे हैं। उनके कई विरोधियों को जेल भेजा जा चुका है।





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