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मंत्री पीयूष गोयल ने कहा- भारत में अब 112 देशों से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आ रहा, जबकि 2013-14 में यह आंकड़ा 89 था

नई दिल्ली
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत में अब 112 देशों से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आ रहा है, जबकि 2013-14 में यह आंकड़ा 89 था। इससे देश की ग्लोबल अपील में वृद्धि की जानकारी मिलती है। राष्ट्रीय राजधानी में स्थित वाणिज्य भवन में इन्वेस्टर राउंडटेबल को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सफलता की कहानी न केवल प्रभावशाली आंकड़ों के बारे में है, बल्कि यह दूरदर्शी सुधारों, नीतिगत स्पष्टता और भारत के आर्थिक भविष्य में वैश्विक समुदाय के भरोसे का भी प्रतिबिंब है।
निवेशक-अनुकूल नीति व्यवस्था पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि अब अधिकांश सेक्टरों में ऑटोमेटिक रूट से 100 प्रतिशत तक एफडीआई की अनुमति है।

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राउंडटेबल में प्रमुख कंपनियों, औद्योगिक पार्कों और औद्योगिक संघों के पक्षकारों सहित 90 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में राजस्थान, महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों के 50 से अधिक औद्योगिक पार्कों का प्रतिनिधित्व किया गया। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव अमरदीप सिंह भाटिया ने अपने संबोधन में कहा कि एफडीआई भारत के विकास की आधारशिला है और भारत की क्षमता में वैश्विक विश्वास का एक प्रमुख संकेतक है। उन्होंने देश के भीतर पुनर्निवेश बढ़ाने, औद्योगिक पार्क के बुनियादी ढांचे में सुधार करने और नए विस्तार के अवसरों का पता लगाने के लिए निवेशकों से विचार और सुझाव आमंत्रित किए।

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डीपीआईआईटी के सचिव ने विदेशी निवेश को और अधिक बढ़ाने के लिए लक्षित नीतिगत हस्तक्षेपों के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने प्रमुख निवेशकों से अपने परिचालन को बढ़ाने, स्टार्टअप में निवेश करने और भारत की बढ़ती निवेश गति में योगदान देने पर विचार करने का भी आग्रह किया। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिभागियों ने सरकार के सक्रिय नीतिगत उपायों और उदार निवेश मानदंडों की सराहना की, जिसने भारत की आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में स्थिति को बढ़ाया है। पक्षकारों ने भूमि एवं श्रम सुधार, कौशल विकास, केंद्र-राज्य नीति समन्वय, विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास में एफडीआई सीमा बढ़ाने और विनिर्माण एवं हरित ऊर्जा में निवेश को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर सुझाव भी साझा किए।

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