जेपी अस्पताल:स्वास्थ्य विभाग के इकलौते न्यूरो सर्जन, पर 3 साल में एक भी सर्जरी नहीं की, ओपीडी में मरीज देख रहे
आपको यह जानकर हैरानी होगी कि प्रदेश के पूरे स्वास्थ्य विभाग के इकलौते न्यूरो सर्जन जेपी अस्पताल में बैठते हैं। एमसीएच डॉ. योगेश तिवारी तीन साल से भी ज्यादा वक्त से जेपी हॉस्पिटल में बैठ रहे हैं। लेकिन फिर भी जेपी अस्पताल में एक भी न्यूरो सर्जरी नहीं हुई है।
ये स्थिति तब है, जब जेपी अस्पताल में हररोज सड़क हादसों में घायल मरीज पहुंचते हैं, इनको हमीदिया अस्पताल रैफर कर दिया जाता है। यह स्थिति जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण है। डॉ. तिवारी ने जेपी अस्पताल प्रबंधन समेत स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों को भी इस संबंध में कई बार पत्र भी लिखे। लेकिन, यहां न तो ऑपरेशन थिएटर की सुविधा उपलब्ध कराई गई और न ही वार्ड की। यही वजह है कि न्यूरो सर्जन होने के बाद भी यहां मरीजों को ब्रेन सर्जरी की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
कई बार प्रस्ताव भेजा, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई
दरअसल, डॉ. योगेश तिवारी की पोस्टिंग कैलाशनाथ काटजू अस्पताल में है। वे सप्ताह में दो दिन मंगलवार और गुरुवार को जेपी अस्पताल की ओपीडी में ही बैठते हैं। उनके पास एक दिन की ओपीडी में 15-20 मरीज आते हैं। इनमें भी कई मरीज ऐसे होते हैं जिनको न्यूरो या ब्रेन सर्जरी की जरूरत होती है, लेकिन अस्पताल में यह सुविधा नहीं होने की स्थिति में उनका इलाज भी दवाइयों के सहारे ही किया जाता है। या फिर उन्हें रैफर करना पड़ता है।
हमीदिया अस्पताल में थे, तब खूब सर्जरी कीं
डॉ. तिवारी बतौर मेडिकल ऑफिसर जेपी अस्पताल में पदस्थ हुए थे। इसके बाद उन्होंने बनारस से एमसीएच किया। 2006 में उन्हें हमीदिया अस्पताल भेजा गया था। 2015 तक यहां रहे तो खूब सर्जरी कीं। इसके बाद उन्हें स्वास्थ्य विभाग ने वापस बुला लिया। चूंकि, स्वास्थ्य विभाग में न्यूरो सर्जन का पद ही नहीं है। ऐसे में बतौर मेडिकल ऑफिसर पदस्थ किया गया है।
चार साल पहले दी थी लिस्ट अब तक उपकरण नहीं आए
2018 में डॉ. तिवारी ने एक प्रस्ताव बनाकर जेपी अस्पताल प्रबंधन को दिया था। इसमें उन्होंने 5 बेड का वार्ड और सर्जरी के लिए ओटी में दिन तय करने की मांग की थी। साथ ही सर्जरी में जरूरी कुछ उपकरणों की सूची देकर यह उपकरण मंगाने को कहा था। लेकिन, अब तक न तो कोई वार्ड उन्हें दिया गया और न ही उपकरण आए हैं।
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आसानी से हो सकती है सर्जरी की शुरुआत
जेपी अस्पताल में दो ऑपरेशन थिएटर हैं। एक ऑर्थोपेडिक्स डिपार्टमेंट के लिए तो दूसरी जनरल सर्जरी के लिए। ऐसे में यहां सप्ताह में एक-दो दिन तय किए जा सकते हैं। कोरोना के दौरान आईसीयू वार्ड बनाया गया था। वेंटिलेटर भी हैं, जो हमेशा खाली रहते हैं। इसका उपयोग न्यूरो सर्जरी के मरीजों को भर्ती करने के लिए किया जा सकता है।
एक्सीडेंट के मरीज…
जेपी अस्पताल में रोज सड़क हादसों में गंभीर रूप से घायल मरीज आते हैं। इनमें कई मरीजों को सिर में चोट होने से तुरंत सर्जरी की जरूरत होती है। अभी न्यूरो सर्जरी की सुविधा नहीं होने की स्थिति में मरीजों को हमीदिया अस्पताल रैफर किया जाता है। वहां तक पहुंचने में एंबुलेंस को 20 मिनट या उससे भी ज्यादा का वक्त लगता है।
मैं तो सर्जरी करना चाहता हूं
मैं सर्जरी करना चाहता हूं। उसके लिए सुविधाएं चाहिए। मैनेजमेंट से बात की, प्रस्ताव भी दिया। लेकिन, किसी ने गंभीरता से ही नहीं लिया। यही वजह है कि ओपीडी में मरीज देख रहा हूं।
डॉ. योगेश तिवारी, न्यूरो सर्जन, जेपी अस्पताल
सर्जरी के लिए पूरी टीम चाहिए
डॉ. योगेश तिवारी सर्जिकल स्पेशलिस्ट हैं। किसी केस में जरूरत पड़ने पर उनकी सलाह ली जाती है। न्यूरो सर्जरी के लिए पूरी टीम और यूनिट की जरूरत होती है। व्यवस्था करते हैं, ताकि मरीजों को लाभ मिले।






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