Breaking News
[the_ad id='4127']
[the_ad id="4127"]

जाने मौत से मिलकर लौटने पर कैसा लगा:567 मरीजों का अनुभव- लगता है शरीर से दूर जा रहे हैं

 

जाने मौत से मिलकर लौटने पर कैसा लगा:567 मरीजों का अनुभव- लगता है शरीर से दूर जा रहे हैं

दिल का दौरा पड़ने के बाद कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) देकर बचाए गए हर पांच में से एक व्यक्ति को मौत का करीबी अनुभव होता है। इस दौरान पीड़ित को एहसास होता है कि वह शरीर से अलग होकर दूर जा रहा है। उसकी आंखों के सामने पूरी जिंदगी रील की तरह घूमने लगती है।

शाहरुख खान को मुंबई एयरपोर्ट पर कस्टम ने रोका:शारजाह से 18 लाख की घड़ियां लाए थे, 7 लाख रुपए का जुर्माना लगा

यह खुलासा न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के ग्रोसमैन स्कूल ऑफ मेडिसिन के रिसर्चर्स ने एक हालिया स्टडी में किया है। इसमें शामिल लोगों ने बताया कि हार्ट अटैक के बाद CPR के दौरान उन्हें कभी न होने वाले अनुभव हुए।

CPR पर हुई रिसर्च को 5 पॉइंट में समझिए…

1. 567 मरीजों पर 3 साल चली रिसर्च
2017 से 2020 तक पहली बार इस तरह की स्टडी की गई, जिसमें 567 मरीजों को शामिल किया गया। इन लोगों को धड़कन रुकने के बाद CPR देकर बचाया गया था। सभी मरीज अमेरिका और इंग्लैंड के अस्पतालों में भर्ती थे।

See also  ऐसी अंगूठी नहीं देखी होगी, 24 हजार हीरे जड़े हैं:गिनीज बुक में दर्ज, तो ब्लू डायमंड की सबसे महंगी 373 करोड़ में हुईथी नीलामी

प्रेमी ने लिव इन पार्टनर के 35 टुकड़े किए:18 दिन तक हर रात 2 बजे घर से निकलता, पूरी दिल्ली में टुकड़े ठिकाने लगाता

2. CPR के दौरान सब कुछ रंगीन, चमकीला दिखा
रिसर्च में शामिल कई लोगों ने बताया कि CPR के दौरान उनकी आंखों की रोशनी स्पष्ट थी और उन्हें सब कुछ रंगीन और चमकीला दिखाई देने लगा था। ऊंचाई से गिरने, जानलेवा हमले और धमाके के दौरान भी मौत के करीबी अनुभव होते हैं।

रिसर्च में मरीजों ने बताया कि उन्हें शरीर से अलग होने का एहसास हुआ।

3. आंखों के सामने फिल्म जैसी दिखती है जिंदगी
रिसर्च में शामिल एक व्यक्ति ने बताया कि CPR देने पर वह एक अंधेरी जगह में चला गया, लेकिन उसे डर नहीं लग रहा था। वहां बहुत शांति थी। फिर उसकी आंखों के सामने पूरी जिंदगी थ्री-डी फिल्म की तरह चलने लगी। बचपन से लेकर जवानी तक का घटनाक्रम साफतौर पर सामने आया।

See also  शख्स ने ऑनलाइन मंगवाया था लैपटॉप, घर पहुंचे डिब्बे में से निकला 'कुत्तों का खाना'!

4. CPR देने के एक घंटे तक दिमाग रहता है एक्टिव
मरीजों पर हुए ब्रेन स्कैन में यह बात सामने आई कि CPR देते समय मरीजों के दिमाग की गतिविधियां भी बढ़ गई थीं। एक घंटे तक उनके दिमाग से गामा, डेल्टा, थीटा, अल्फा और बीटा तरंगें निकल रही थीं। ब्रेन से यह तरंगें तब निकलती हैं, जब व्यक्ति होश में होता है और सोच रहा होता है। मगर कार्डिएक अरेस्ट में CPR के दौरान पहली बार इन्हें एक्टिव पाया गया।

वैज्ञानिकों के मुताबिक CPR लेने वाले मरीजों को आगे जाकर एंग्जाइटी और डिप्रेशन भी हो सकता है।

5. मरीजों को लेना पड़ सकता है मेंटल हेल्थ सपोर्ट
मेडिकल फील्ड में हमेशा से ही यह माना जाता है कि कार्डिएक अरेस्ट की स्थिति में मरीज बेहोश हो जाते हैं। मगर यह स्टडी कुछ और ही साबित कर रही है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह जानना जरूरी है कि क्या CPR के दौरान मरीजों को आसपास की चीजों के बारे में जानकारी थी। इसके लिए तबीयत ठीक होने के बाद मरीजों की काउंसिलिंग जरूरी है।

See also  ज़रूर पड़े ये क्यों हो रहा है... लंदन में बिना पैंट पहने ही सड़क पर क्यों घूम रहे लड़के-लड़कियां! ये है इसकी वजह

CPR होता क्या है?
CPR का फुलफॉर्म कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन है। यह एक लाइफ सेविंग टेक्नीक है, जिसका इस्तेमाल हार्ट अटैक (दिल का दौरा) के दौरान किया जाता है। अगर किसी इंसान के दिल की धड़कनें बंद हो जाएं तो घर से अस्पताल जाने के दौरान CPR लाइफ सेविंग का काम करता है।

बच्चे को CPR देने का तरीका बड़ों से अलग होता है

बच्चे को पीठ के बल सीधा लेटा दें और उसके पास घुटने के बल बैठें।
बच्चे को CPR देने के लिए दो उंगलियों का इस्तेमाल करें।
चेस्ट (छाती) पर हल्का प्रेशर दें, 1/2 से 2 इंच तक ही प्रेशर डालें।

 

Facebook
Twitter
LinkedIn

Related Posts

[the_ad id='4119']
Verified by MonsterInsights