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मोक्षदा एकादशी करने पर वैखानस राजा के पिता को मिली थी नरक से मुक्ति, ये है व्रत का महत्व

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत सबसे ज्यादा प्रचलित व्रतों में से एक है. हर मास की शुक्ल व कृष्ण पक्ष की एकादशी के हिसाब से ये व्रत साल में 24 बार किया जाते हैं. इनमें एक व्रत मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष एकादशी का है, जिसे मोक्षदा एकादशी के नाम से जाना जाता है.  अनुसार इस व्रत की कथा का संबंध गोकुल के राजा बैखानस से माना जाता है. जिनके पिता एक स्त्री के शाप से नरकगामी हुए थे. इसके बाद राजा बैखानस ने एक ऋषि के आदेश से मोक्षदा एकादशी का व्रत किया था, जिसके फल से उनके पिता को स्वर्ग की प्राप्ति हुई. आज हम आपको भगवान श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को बताई गई उसी कथा व व्रत की विधि के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे सुनने से ही वाजपेय यज्ञ का फल मिलने की मान्यता है. मोक्षदा एकादशी की कहानी गोकुल नगर में वैैखानस नाम का योग्य व प्रतापी राजा था. एक बार उसने स्वप्न में अपने पिता को नरक में कष्ट भोगते देखा. यह देख वह बहुत दुखी हुआ. उसने अगले दिन यह बात अपने विद्वान ब्राह्मणों को बताते हुए पिता की नरक से मुक्ती का उपाय पूछा. इस पर ब्राह्मणों ने राजा को पास ही के पर्वत पर रहने वाले एक ऋषि के पास जाने की सलाह दी.ऐसा सुनकर राजा मुनि के आश्रम पर गया. जहां उसने मुनि को प्रणाम कर अपना स्वप्न सुनाया और पिता की मुक्ति का उपाय पूछा. ये सुन मुनि ने आँखें बंद कर ध्यान लगाया. योग बल से सब जानकर उन्होंने राजा से कहा कि तुम्हारे पिता ने पूर्व जन्म में कामातुर होकर एक पत्नी को तो रति दे दी, पर सौत के कहने पर दूसरी पत्नी को मांगने पर भी ऋतुदान नहीं दिया. उसी पापकर्म के कारण तुम्हारे पिता को नरक में जाना पड़ा.

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत सबसे ज्यादा प्रचलित व्रतों में से एक है. हर मास की शुक्ल व कृष्ण पक्ष की एकादशी के हिसाब से ये व्रत साल में 24 बार किया जाते हैं. इनमें एक व्रत मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष एकादशी का है, जिसे मोक्षदा एकादशी के नाम से जाना जाता है.  अनुसार इस व्रत की कथा का संबंध गोकुल के राजा बैखानस से माना जाता है. जिनके पिता एक स्त्री के शाप से नरकगामी हुए थे. इसके बाद राजा बैखानस ने एक ऋषि के आदेश से मोक्षदा एकादशी का व्रत किया था, जिसके फल से उनके पिता को स्वर्ग की प्राप्ति हुई. आज हम आपको भगवान श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को बताई गई उसी कथा व व्रत की विधि के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे सुनने से ही वाजपेय यज्ञ का फल मिलने की मान्यता है.

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मोक्षदा एकादशी की कहानी
गोकुल नगर में वैैखानस नाम का योग्य व प्रतापी राजा था. एक बार उसने स्वप्न में अपने पिता को नरक में कष्ट भोगते देखा. यह देख वह बहुत दुखी हुआ. उसने अगले दिन यह बात अपने विद्वान ब्राह्मणों को बताते हुए पिता की नरक से मुक्ती का उपाय पूछा. इस पर ब्राह्मणों ने राजा को पास ही के पर्वत पर रहने वाले एक ऋषि के पास जाने की सलाह दी.ऐसा सुनकर राजा मुनि के आश्रम पर गया. जहां उसने मुनि को प्रणाम कर अपना स्वप्न सुनाया और पिता की मुक्ति का उपाय पूछा. ये सुन मुनि ने आँखें बंद कर ध्यान लगाया. योग बल से सब जानकर उन्होंने राजा से कहा कि तुम्हारे पिता ने पूर्व जन्म में कामातुर होकर एक पत्नी को तो रति दे दी, पर सौत के कहने पर दूसरी पत्नी को मांगने पर भी ऋतुदान नहीं दिया. उसी पापकर्म के कारण तुम्हारे पिता को नरक में जाना पड़ा.

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