
सृष्टि में जन्म लेने वाले प्रत्येक मनुष्य की मृत्यु निश्चित होती है. गीता में कहा गया है कि आत्मा अजर अमर होती है, इसलिए मृत्यु के बाद मनुष्यों को अपना शरीर त्याग करना पड़ता है. मृत्यु के बाद आत्मा यमलोक कैसे पहुंचती है, इसका पूरा विवरण गरुण पुराण में मिलता है. गरुड़ पुराण के अनुसार, व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात उसे वैतरणी नदी से होकर गुजरना पड़ता है. ऐसे में आज हम आपको वैतरणी नदी से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें बताएंगे.
वैतरणी नदी का रहस्य
व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात यम के दूत आत्मा को वैतरणी नदी से लेकर जाते हैं. गरुड़ पुराण के प्रेतखंड के अनुसार, वैतरणी नदी का स्वरूप आत्मा पर निर्भर करता है. अगर कोई पुण्य आत्मा वैतरणी नदी को पार कर रही है तो उसको किसी भी कष्ट का सामना नहीं करना पड़ता. इसके विपरीत अगर कोई पापी आत्मा वैतरणी नदी को पार करती है तो उसे अनेक कष्टों भोगने पड़ते हैं.
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बुरी आत्माओं को भोगना पड़ता है कष्ट
गरुड़ पुराण के अनुसार, दुष्ट आत्माओं के लिए वैतरणी नदी का स्वरूप हर क्षण बदलता रहता है, बुरी आत्माओं को वैतरणी नदी का भयंकर रूप सहना पड़ता है. गरुड़ पुराण में उल्लेख है कि व्यक्ति को अपने जीवन में दान पुण्य करना चाहिए, ताकि मृत्यु के बाद वह वैतरणी नदी को बिना कष्टों के पार कर सके. क्योंकि पापी जीवात्मा को वैतरणी नदी में बहुत सारी यातनाएं झेलनी पड़ती हैं.





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