
दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फील्डर रहे जोंटी रोड्स का कहना है कि उनकी टीम चोकर्स नहीं है, बल्कि वर्ल्ड कप में किस्मत के कारण हारी है। टीम ने अब तक 15 वर्ल्ड कप खेले हैं, लेकिन कभी फाइनल में नहीं पहुंच सकी है। इसीलिए उसे चोकर कहा जाता है।
53 साल के पूर्व साउथ अफ्रीकी क्रिकेटर जोंटी ने शुक्रवार को भोपाल में एक टॉक-शो के दौरान कहा- ‘साउथ अफ्रीका ने भले ही कोई वर्ल्ड कप नहीं जीता हो, लेकिन हमारी टीम खराब नहीं थी। अधिकांश वर्ल्ड कप में हम खराब किस्मत से हारे हैं। न कि खराब प्रदर्शन से। कभी बारिश ने खलल डाला तो हम किसी अन्य कारण से मैच हार गए। बात चाहे 1992 वर्ल्ड कप की हो या फिर किसी की।’
हम आपको याद दिला दें कि 1992 में साउथ अफ्रीका सेमीफाइनल मुकाबले में इंग्लैंड के खिलाफ बारिश के कारण बाहर हो गई थी। जबकि, 1999 में टीम ऑस्ट्रेलिया सुपर-6 के आखिरी मुकाबले में मिली बढ़त के कारण बाहर हो गए थे। वहीं, 2003 में अफ्रीकी टीम ने डकवर्थ लुईस मैथड के टारगेट कैलक्यूलेट में गलती कर दी और महज 3 रन से हार गई थे।
जोंटी द फील्डर
जोंटी ने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा- ‘मैं खुद को बैटर की जगह फील्डर कहना पसंद करता था। क्योंकि, क्रिकेट में बैट्समैन के पास एक ही मौका होता है। यदि वह आउट हो गया, तो बाहर। जबकि फील्डर के पास टीम के लिए सहयोग करने के एक से ज्यादा मौके होते हैं, यदि एक कैच छूट भी गया तो वह दूसरा कैच पकड़ सकता है। या फिर रन बचा सकता है।’
मैंने क्रिकेट को नहीं, क्रिकेट ने मुझे चुना
फील्डिंग लीजेंड ने कहा- ‘मैंने क्रिकेट को नहीं, बल्कि क्रिकेट ने मुझे चुना था। मेरे पिता एक स्कूल के हेडमास्टर और मोटीवेटर थे। वे अनुशासन में रहना पसंद करते थे।’
IPL से बहुत कुछ सीखा
रोड्स ने कहा- ‘मैंने एक कोच के तौर पर IPL से बहुत कुछ सीखा है और मैं हमेशा खिलाड़ियों को सिखाता हूं कि बॉल के लिए जाओ।’ मेरा मानना है कि केवल प्रैक्टिस ही परफेक्ट नहीं बनाती है। बल्कि आपको परफेक्ट प्रैक्टिस करनी होती है।’
फिटनेस का मतलब बाइसेप्स नहीं
रोट्स ने कहा- ‘फिटनेस का मतलब बाइसेप्स बनाना नहीं है। बल्कि फिट वह है जो सही मूव करता रहे और चीजों का सही तरीके से करें।’
रैना और कैफ मेरे फेवरेट
अपने ऑलटाइम फेवरेट फील्डर के बारे में पूछे जाने पर इस पूर्व क्रिकेटर ने कहा- ‘सुरेश रैना और मोहम्मद कैफ हमेशा मेरे पसंदीदा क्रिकेटर रहे हैं। उन्होंने भारतीय फील्डिंग पर कहा- ‘टीम इंडिया का स्टैंडर्ड हमेशा अतुलनीय रहा है। वे बाउंड्री बचाते हैं। मैंने कभी नहीं सोचा था। इंडिया की सराहना करनी होगी।’





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