जबलपुर. जिसने देखा उसकी आंखों से आंसू छलकते रहे. जिसने सुना वो सहम गया.बात ही कुछ ऐसी थी. जबलपुर (JABALPUR) में तीन महीने की मासूम की मौत हो गयी. मामला कोरोना (CORONA) का था इसलिए तीन दिन से बच्ची की लाश अपने कफन और दफन का इंतज़ार करती रही. गुरुवार को उसे सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया. संक्रमण से बचाने के लिए बच्ची की लाश (deadbody) परिवार को नहीं सौंपी गयी. मां उसे आखिरी बार देख भी नहीं पायी. वो दूर खड़ी होकर सूनी आंखों से उसे मिट्टी में मिलते देखती रही.जो लोग कोरोना वायरस को हल्के में ले रहे हैं. लॉक डाउन और सोशल डिस्टेंस का उल्लंघन कर रहे हैं, ये तस्वीरें उनकी आंखें खोलने के लिए काफी हैं. ये लोग स्ट्रेचर पर पॉलीथिन में लिपटी एक 3 माह की मासूम बच्ची का शव लेकर जा रहे हैं. और एम्बुलेंस में बैठे ये लोग उस बच्ची के परिवार के सदस्य हैं, जिन्हें आखिरी बार बच्ची का चेहरा देखना भी नसीब नहीं हुआ.
दर्द भरी कहानी
ये दर्द भरी हकीकत जबलपुर के हनुमानताल चांदनी चौक इलाके के एक परिवार की है. उनकी तीन माह की बच्ची ने तीन दिन पहले मेडिकल अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था. बच्ची की मौत के बाद जब उसका सैंपल लेकर जांच की गई तो पता चला कि वो कोरोना वायरस से संक्रमित थी. मौत के बाद तीन दिन से उसका शव मॉर्च्यूरी में इसी तरह पॉलीथिन के अंदर पैक करके रखा रहा. बच्ची की मां और पिता उसे आखिरी बार गले लगाना चाहते थे लेकिन उसे छूना तो दूर माता-पिता को उसे देखने तक की इजाजत नहीं मिली.
ये दर्द भरी हकीकत जबलपुर के हनुमानताल चांदनी चौक इलाके के एक परिवार की है. उनकी तीन माह की बच्ची ने तीन दिन पहले मेडिकल अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था. बच्ची की मौत के बाद जब उसका सैंपल लेकर जांच की गई तो पता चला कि वो कोरोना वायरस से संक्रमित थी. मौत के बाद तीन दिन से उसका शव मॉर्च्यूरी में इसी तरह पॉलीथिन के अंदर पैक करके रखा रहा. बच्ची की मां और पिता उसे आखिरी बार गले लगाना चाहते थे लेकिन उसे छूना तो दूर माता-पिता को उसे देखने तक की इजाजत नहीं मिली.






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