Breaking News

ज़रूर पढ़ें गुरु पूर्णिमा आज गुरु पूजन कर के जीवन मे सुख संपदा तथा धन लाभ पूरे वर्ष भर मिलता है By pandit manu Mishra 13, July 2022

 ज़रूर पढ़ें गुरु पूर्णिमा आज गुरु पूजन कर के जीवन मे सुख संपदा तथा धन लाभ पूरे वर्ष भर मिलता है 

By pandit manu Mishra 13, July 2022

ज़रूर पढ़ें गुरु पूर्णिमा आज गुरु पूजन कर के जीवन मे सुख संपदा तथा धन लाभ पूरे वर्ष भर मिलता है  By pandit manu Mishra 13, July 2022

गुरू पूर्णिमा उन सभी आध्यात्मिक और अकादमिक गुरूजनों को समर्पित परम्परा है जिन्होंने कर्म योग आधारित व्यक्तित्व विकास और प्रबुद्ध करने, बहुत कम अथवा बिना किसी मौद्रिक खर्चे के अपनी बुद्धिमता को साझा करने के लिए तैयार हों। इसको भारत, नेपाल और भूटान में हिन्दू, जैन और बोद्ध धर्म के अनुयायी उत्सव के रूप में मनाते हैं। यह पर्व हिन्दू, बौद्ध और जैन अपने आध्यात्मिक शिक्षकों / अधिनायकों के सम्मान और उन्हें अपनी कृतज्ञता दिखाने के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व हिन्दू पंचांग के हिन्दू माह आषाढ़ की पूर्णिमा (जून-जुलाई) मनाया जाता है।

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); ॐ 

See also  बैंक से 42 हजार रूपये निकाल कर बैग मे रखकर पति के साथ मोटर सायकिल से जा रही महिला से रूपयों का बैग छीनने वाले पल्सर मोटर सायकिल सवार दोनों लुटेरे गिरफ्तार By manu Mishra 18 July 2022

आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन गुरु पूजा का विधान है। गुरु पूर्णिमा वर्षा ऋतु के आरम्भ में आती है। इस दिन से चार महीने तक परिव्राजक साधु-सन्त एक ही स्थान पर रहकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं। ये चार महीने मौसम की दृष्टि से भी सर्वश्रेष्ठ होते हैं। न अधिक गर्मी और न अधिक सर्दी। इसलिए अध्ययन के लिए उपयुक्त माने गए हैं। जैसे सूर्य के ताप से तप्त भूमि को वर्षा से शीतलता एवं फसल पैदा करने की शक्ति मिलती है, वैसे ही गुरु-चरणों में उपस्थित साधकों को ज्ञान, शान्ति, भक्ति और योग शक्ति प्राप्त करने की शक्ति मिलती है

यह दिन महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्मदिन भी है। वे संस्कृत के प्रकांड विद्वान थे। उनका एक नाम वेद व्यास भी है। उन्हें आदिगुरु कहा जाता है और उनके सम्मान में गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा नाम से भी जाना जाता है।

See also  दैनिक राशिफल आज का राशिफल शुक्रवार, 30 जुलाई, 2021 Daily Horoscope Today's Horoscope , fridayJuly 30 2021

शास्त्रों में गु का अर्थ बताया गया है- अंधकार या मूल अज्ञान और रु का का अर्थ किया गया है- उसका निरोधक। गुरु को गुरु इसलिए कहा जाता है कि वह अज्ञान तिमिर का ज्ञानांजन-शलाका से निवारण कर देता है।[ अर्थात अंधकार को हटाकर प्रकाश की ओर ले जाने वाले को ‘गुरु’ कहा जाता है।

“अज्ञान तिमिरांधश्च ज्ञानांजन शलाकया,

चक्षुन्मीलितम तस्मै श्री गुरुवै नमः “

गुरु तथा देवता में समानता के लिए एक श्लोक में कहा गया है कि जैसी भक्ति की आवश्यकता देवता के लिए है वैसी ही गुरु के लिए भी। [क] बल्कि सद्गुरु की कृपा से ईश्वर का साक्षात्कार भी संभव है। गुरु की कृपा के अभाव में कुछ भी संभव नहीं है।

See also  आर्थिक पक्ष मजबूत करना है तो अपनाएं ये उपाय दिन दुगनी रात चौगुनी बढ़ती महंगाई और आम जिंदगी की जरुरतों के कारण आपकी आर्थिक स्थिति बार-बार डांवाडोल हो रही है तो परेशान होने की बजाय इस समस्या का समाधान खुद निकालें। हर व्यक्ति चाहता है कि उसके घर में लक्ष्मी की कृपा बरसती रहे और घर में सुख-समृद्धि का वास हो। लेकिन कई बार प्रयास करने के बावजूद भी घर में लक्ष्मी नहीं रूकती हैं। शुक्रवार का दिन देवी लक्ष्मी का दिन माना जाता है। आज हम आपको कुछ ऐसे उपाय बताने जा रहे हैं जिन्हें शुक्रवार के दिन अपनाने से आपकी आर्थिक स्थिति में अवश्य सुधार आएगा। लक्ष्मी माता आपसे प्रसन्न होकर घर में धन वर्षा करेंगी। ये बहुत ही अद्भुत व सरल उपाय हैं। आर्थिक पक्ष मजबूत करने के कुछ उपाय समस्या का समाधन यह है कि आप कुछ ऐसे उपाय करें जिससे एक ओर आपकी आय बढ़े तो वहीं दूसरी ओर आय के मुकाबले खर्च में कमी आए। यदि इन दोनों बातों में तालमेल बन जाए तो आपकी आर्थिक समस्या से जुड़ी चिंताएं दूर हो जाएगीं। इसके लिए पांच उपाय ऐसे हैं जिन्हें आप आसानी से आजमा सकते हैं। झाड़ू से धन आगमन का बनाएं रास्ता धार्मिक मान्यताओं के अनुसार झाड़ू में देवी लक्ष्मी का वास होता है जो कंगाली और दरिद्रता को दूर करके घर में सुख-संपत्ति की वृद्धि करती हैं। यही कारण है कि झाड़ू को छुपाकर रखने की बात कही जाती है और कहा जाता है कि झाड़ू को न कभी पटकना और न ही पैर लगाना चाहिए। जो लोग धन संबंधी समस्याओं से परेशान रहते हैं उन्हें शुक्रवार के दिन झाड़ू मंदिर में दान करना चाहिए। इससे मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और आय में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। गाय को खिलाए रोटी नियमित रूप से गाय को रोटी या हरी घास खिलाकर व्यक्ति अपने जीवन में बहुत से सकारात्मक बदलाव ला सकता है। ऐसा करने वाले व्यक्ति की कुंडली में बैठे क्रूर ग्रह शांत होते हैं और घर में लक्ष्मी की कृपा बरसती रहे और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। धनिये से करें धन में वृद्धि धन वृद्धि हेतु एक अन्य उपाय आप यह भी कर सकते हैं कि शुक्ल पक्ष के किसी भी मंगलवार या गुरुवार के दिन एक मिट्टी के बर्तन में 21 रुपये के सिक्के डालकर उसके ऊपर मिट्टी भर इसमें धनिया बो दें। इसे नियमित जल दें। यदि धनिया खूब हरा भरा उपजे तो समझ लीजिए कि आपकी आर्थिक स्थिति सुधारने वाली है। धनिये के पत्ते को आप जैसे चाहें वैसा उपयोग कर सकते हैं। इसके बाद सिक्कों को निकालकर लाल कपड़े में बांधकर घर के उस स्थान में रख दें, जहां आप पैसे या कीमती सामान रखते हैं। गरुवार या शुक्रवार के दिन करें यह काम शुक्रवार के दिन अशोक के पेड़ की जड़ लाकर उसे गंगा जल से शुद्ध करके लाल कपड़े में लपेट कर दाएं हाथ के बाजू में बांध लें। अगर आप चाहें तो इसे तिजोरी या धन रखने के स्थान पर भी रख सकते हैं। इसके अलावा एक अन्य उपाय आजमा सकते हैं, गुरुवार के दिन केले के वृक्ष की जड़ को पीले कपड़े में लपेटकर दाएं बाजू में बांध लें। यह भी धन बाधा दूर करने में आपकी सहायता करेगा। यह दोनों ही ग्रह धन और सुख के कारक हैं। लेकिन यह ध्यान रखें कि केवल एक ही वस्तु का प्रयोग करें। दोनों का प्रयोग करने पर परिणाम विपरीत मिल सकता है और लाभ के बजाय आपको हानि का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि इन दोनों ग्रहों में शत्रुवत संबंध हैं। शनिवार के दिन करें धन वृद्धि के यह उपाय धन लाभ के लिए शनिवार के दिन एक सूखा नारियल लेकर उसके बीच में सुराख बना लें और उसके अंदर आटा, चीनी, तिल और गुड़ भर दें। इस नारियल को शाम के समय सुनसान स्थान पर ले जाकर जमीन में दबा दें। इस उपाय से ग्रह दोषों के कारण धन आगमन में आने वाली बाधाएं दूर होगीं। प्रयास करें कि हर शनिवार के दिन चिटियों को आटा दें और शनि महाराज को सरसो के तेल का दीप दान करें।

आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन गुरु पूजा का विधान है। गुरु पूर्णिमा वर्षा ऋतु के आरम्भ में आती है। इस दिन से चार महीने तक परिव्राजक साधु-सन्त एक ही स्थान पर रहकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं। ये चार महीने मौसम की दृष्टि से भी सर्वश्रेष्ठ होते हैं। न अधिक गर्मी और न अधिक सर्दी। इसलिए अध्ययन के लिए उपयुक्त माने गए हैं। जैसे सूर्य के ताप से तप्त भूमि को वर्षा से शीतलता एवं फसल पैदा करने की शक्ति मिलती है, वैसे ही गुरु-चरणों में उपस्थित साधकों को ज्ञान, शान्ति, भक्ति और योग शक्ति प्राप्त करने की शक्ति मिलती है।

Facebook
Twitter
LinkedIn

Related Posts

Verified by MonsterInsights