
नई दिल्ली। कोरोना संकट के चलते देश में लगे लॉकडाउन के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार चार दिन से आर्थिक पैकेज के अलग-अलग पहलुओं का ऐलान कर रही है। इसी कड़ी में गत दिवस वित्त मंत्री ने आठ महत्वपूर्ण सेक्टर्स के लिए बड़े ऐलान किए। लेकिन वित्त मंत्री की इन की गई घोषणाओं के खिलाफ मजदूरों के बीच व्यापक पैमाने पर काम कर रहा आरएसएस से जुड़ा संगठन भारतीय मजदूर संघ सामने आया है । उसने आर्थिक पैकेज को लेकर सरकार की आलोचना की है।
भारतीय मजदूर संघ ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा की गई चौथे दिन की घोषणाएं देश और देशवासियों के लिए खुशी देनेवाली साबित नहीं हुईं । भारतीय मजदूर संघ के जनरल सेक्रेटरी वृजेश उपाध्याय ने बयान जारी करके कहा कि सरकार मजदूर संघों से राय लेने से कतरा रही है, जिस तरह से समाज के प्रतिनिधियों और प्रभावित लोगों का नेतृत्व करने वालों का सरकार सुझाव नहीं ले रही है वह निंदनीय है। हमारा संघ पहले ही कॉर्पोरेटाइजेशन और प्राइवेटाइजेशन का विरोध कर रही है।
उन्होंने कहा कि डिफेंस में एफडीआई के निवेश को बढ़ाने का फैसला कतई सही नहीं है और यह आपत्तिजनक है। इससे पहले भारतीय मजदूर संघ समय-समय पर आन्दोलन एवं सड़कों पर उतरकर भी केंद्र की मोदी सरकार की कुछ आर्थिक नीतियों का विरोध करती रही है।
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ भारतीय मजदूर संघ (Bharatiya mazdoor sangh ) लगातार देश में बढ़ती बेरोजगारी और सरकार की निजीकरण नीति के विरोध में प्रदर्शन करने सड़कों पर उतरता रहा है । बीएमएस के महासचिव विरजेश उपाध्याय (general secretary Brijesh Upadhyay) इन सभी प्रदर्शनों को लेकर पहले ही कहते रहे हैं कि केंद्र सरकार द्वारा रेलवे का 35 फीसदी हिस्सा निजी हाथों में सौंपा जा चुका है और बचे हुए हिस्से को कॉरपोरेट के तहत लाने पर सरकार काम कर रही है। यह सरासर गलत है।
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ भारतीय मजदूर संघ (Bharatiya mazdoor sangh ) लगातार देश में बढ़ती बेरोजगारी और सरकार की निजीकरण नीति के विरोध में प्रदर्शन करने सड़कों पर उतरता रहा है । बीएमएस के महासचिव विरजेश उपाध्याय (general secretary Brijesh Upadhyay) इन सभी प्रदर्शनों को लेकर पहले ही कहते रहे हैं कि केंद्र सरकार द्वारा रेलवे का 35 फीसदी हिस्सा निजी हाथों में सौंपा जा चुका है और बचे हुए हिस्से को कॉरपोरेट के तहत लाने पर सरकार काम कर रही है। यह सरासर गलत है।
इसी तरह से केंद्र सरकार पर विनिवेश और निजीकरण के मुद्दे पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए बीएमएस महासचिव उपाध्याय यह भी कहते सुनाई दिए हैं कि “सरकार परमानेंट रोजगार को कॉन्ट्रैक्ट में बदल रही है। पब्लिक सेक्टर को सरकार या तो बेच रही है, या फिर विनिवेश के जरिए दूसरों के हाथों में सौंप रही है। बीएमएस की मांग है कि श्रम कानून में किए गए बदलाव को वापस लिया जाए। बीएमएस ने मोदी सरकार से मांग की है कि सरकारी योजना लागू करने में लगे कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारी बनाया जाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जीएसटी के बदले नियम की वजह से लोकल बॉडी के कर्मचारियों को वेतन मिलने में परेशानी आ रही है।
हालांकि, बीएमएस इस बीच नागरिकता कानून पर सरकार का समर्थन करती भी दिखाई देती है। संगठन के महासचिव विरजेश उपाध्याय ने कहा कि भारतीय मजदूर संघ सरकार के इस फैसले के साथ है। देशभर में इसको लेकर जागरूकता अभियान चलाया गया है। उन्होंने कहा कि इस कानून का विरोध सिर्फ वोट बैंक के लिए किया जा रहा है। देशहित में कोई इस कानून का विरोध नहीं कर सकता है ।





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