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इस साल शून्य रह सकती है भारत की GDP ग्रोथ‑मूडीज

नई दिल्ली. कोरोना वायरस (corona Virus) के संकट के कारण मौजूदा वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ जीरो पर रूक सकती है. रेटिंग एजेंसी ने शुक्रवार को अपने अनुमान में ये बात कही. एजेंसी ने कहा कि भारत को लॉकडाउन के चलते बड़ी गिरावट को झेलना पड़ेगा.

मूडीज (Moodys) ने कहा कि साल 2021 में भारत की ग्रोथ रेट जीरो पर ठहर सकती है लेकिन साल 2022 में तेजी से वापसी करेगी. मूडीज ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर बड़ी उम्मीद जताते हुए कहा कि 2022 में इंडिया की अर्थव्यवस्था की जीडीपी ग्रोथ 6.6 फीसदी तक रह सकती है. यदि ऐसा होता है तो भारत को मंदी के संकट से निकलने में बड़ी मदद मिलेगी. भारत की अर्थव्यवस्था गहरे संकट में जा सकती है.

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रेटिंग एजेंसी ने संकेत दिया कि फिलहाल “Baa2 नेगेटिव” रेटिंग में अपग्रेड की कोई सूरत नजर नहीं आ रही है. कोरोना संकट के कारण देश में 25 मार्च से लॉकडाउन है. आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह से ठप पड़ी हुई हैं. जिसके कारण से जीडीपी ग्रोथ काफी कमजोर हुई है.

मूडीज ने अपने अनुमान को लेकर भारतीय अर्थव्यवस्था के सिमटने के कारण बताते हुए कहा कि कोविड ‑19 का तेजी से प्रसार, वैश्विक आर्थिक दृष्टिकोण में गिरावट, तेल की कीमतें गिरना और वित्तीय बाजार में उथल‑पुथल भारी संकट पैदा कर रहा है.

मूडीज का अनुमान है कि महामारी से आर्थिक झटके और इससे निपटने के लिए वित्तीय उपाय किए जाने से भारत का राजकोषीय घाटा 3.5 फीसदी के लक्ष्य से ज्यादा बढ़ सकता है. विकास दर सुधारने के लिए और खर्च बढ़ाया जाता है तो राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष में 5.5 फीसदी तक जा सकता है.

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जानिए क्या है इस रेटिंग का मतलब?
“Baa2” रेटिंग में से a2 इकोनॉमिक स्ट्रेंथ के लिए है.जबकि baa3 इंस्टीट्यूशनल और गवर्नेंस स्ट्रेंथ के लिए माना जाता है. b1 के मायने फिस्कल स्ट्रेंथ औरba का मतलब सस्पेक्टबिलिटी से जोखिम से है. रेटिंग एजेंसी का मानना है कि फिस्कल ईयर 2020 में डेफेसिट GDP का 5 फीसदी रह सकता है.

बता दें अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक सहित कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने COVID-19 महामारी से उपजे संकट को लेकर भारत के विकास के पूर्वानुमान में कटौती की है.

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